Coffee exports 2026: भारत की कॉफी इंडस्ट्री के लिए साल 2025-26 बेहद खास साबित हुआ है. इस साल देश ने कॉफी निर्यात में नया रिकॉर्ड बना दिया है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत का कॉफी निर्यात बढ़कर 2.136 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. पिछले साल यह आंकड़ा 1.82 अरब डॉलर था, यानी इस बार करीब 17 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
यह बढ़ोतरी सिर्फ संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे बेहतर कीमतें, वैश्विक बाजार में मजबूत मांग और थोड़ी बहुत उत्पादन बढ़ोतरी जैसे कई कारण शामिल हैं.
निर्यात में मात्रा और कीमत दोनों का योगदान
अगर मात्रा की बात करें तो इस साल भारत ने 4.07 लाख टन से ज्यादा कॉफी का निर्यात किया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 3.88 लाख टन था. यानी करीब 4.65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. लेकिन असली फर्क कीमतों ने बनाया है. इस साल प्रति टन कॉफी की औसत कीमत 4,64,041 रुपये रही, जो पिछले साल के 3,96,525 रुपये के मुकाबले लगभग 17 फीसदी ज्यादा है.
रुपयों में देखें तो कुल निर्यात 15,421 करोड़ रुपये से बढ़कर 18,887 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो करीब 22.47 फीसदी की शानदार बढ़त दिखाता है.
उत्पादन ने भी दिया साथ
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, कॉफी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश राजाह के अनुसार, इस साल निर्यात में जो मजबूती दिखी है, उसमें बेहतर उत्पादन का भी बड़ा योगदान रहा है. 2024-25 के फसल वर्ष में भारत का कुल कॉफी उत्पादन 3.63 लाख टन रहा, जिसमें 1.05 लाख टन अरेबिका और 2.57 लाख टन रोबस्टा शामिल है. उत्पादन अच्छा होने से निर्यात के लिए पर्याप्त माल उपलब्ध रहा और बाजार की मांग को पूरा करना आसान हुआ.
पश्चिम एशिया संकट से आई चुनौती
हालांकि इस शानदार प्रदर्शन के बीच कुछ मुश्किलें भी सामने आई हैं. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर कॉफी निर्यात पर भी पड़ रहा है. इस क्षेत्र में भेजी जाने वाली कई खेप रास्ते में ही सुरक्षित बंदरगाहों पर रुक गई हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स में दिक्कत आ रही है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि इस संकट का कुल निर्यात पर कितना असर पड़ेगा, लेकिन स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
यूरोप बना सबसे बड़ा बाजार
पश्चिम एशिया में परेशानी के बावजूद यूरोप भारतीय कॉफी का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है. इटली, जर्मनी, रूस, बेल्जियम और तुर्की जैसे देश भारत से बड़ी मात्रा में कॉफी खरीद रहे हैं. अभी यूरोप के लिए शिपमेंट केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजे जा रहे हैं और उम्मीद है कि आगे मांग और बढ़ेगी.
सरकार और वैल्यू एडेड कॉफी का बड़ा रोल
कॉफी बोर्ड के सीईओ के. एम. कुरमा राव के अनुसार, सरकार की नीतियों ने भी इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है. व्यापार को आसान बनाने के कदम और वैल्यू एडेड कॉफी जैसे इंस्टेंट और प्रोसेस्ड उत्पादों की बढ़ती मांग ने निर्यात को मजबूती दी है.
वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत पकड़
भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक देश है. पिछले चार सालों में भारत का कॉफी निर्यात लगभग दोगुना हो गया है. यह दिखाता है कि भारतीय कॉफी की गुणवत्ता और मांग लगातार बढ़ रही है.
कीमतों में तेजी के पीछे वजह
कॉफी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं. दुनिया के कई बड़े उत्पादक देशों में सप्लाई की कमी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ी हैं. इसके अलावा प्रीमियम और खास किस्म की कॉफी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिसका फायदा भारत को मिला है.
वहीं, अगर वैश्विक मांग इसी तरह बनी रहती है और उत्पादन भी संतुलित रहता है, तो आने वाले समय में भारत का कॉफी निर्यात और बढ़ सकता है. हालांकि पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में चल रही अनिश्चितता एक चुनौती जरूर बनी हुई है.