India coffee exports: भारत की कॉफी इंडस्ट्री के लिए साल 2025 ऐतिहासिक साबित हुआ. अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत मांग और कीमतों में तेज उछाल के चलते भारत का कॉफी निर्यात पहली बार 2 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया. खास बात यह रही कि इस रिकॉर्ड प्रदर्शन के पीछे रूस से बढ़ी खरीद ने बड़ी भूमिका निभाई, जिसने भारत को वैश्विक कॉफी बाजार में नई मजबूती दी.
रिकॉर्ड निर्यात का नया मुकाम
Coffee Board of India के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में कॉफी निर्यात 2.058 अरब डॉलर तक पहुंच गया. यह पिछले साल के 1.679 अरब डॉलर के मुकाबले करीब 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. रुपये के लिहाज से देखें तो कॉफी शिपमेंट का मूल्य 27 प्रतिशत उछलकर 17,911 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 14,046 करोड़ रुपये था. यह बढ़त साफ तौर पर बताती है कि भारत की कॉफी अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा कीमत और पहचान दोनों हासिल कर रही है.
मात्रा घटी, लेकिन कमाई बढ़ी
दिलचस्प बात यह रही कि निर्यात की कुल मात्रा में गिरावट देखने को मिली. साल 2025 में कॉफी का कुल निर्यात 3.48 लाख टन रहा, जो पिछले साल की तुलना में 4.5 प्रतिशत कम है. इसके बावजूद कुल कमाई बढ़ने का मुख्य कारण वैश्विक बाजार में कीमतों का ऊंचा रहना रहा. प्रति टन औसत निर्यात मूल्य 33 प्रतिशत बढ़कर 4.65 लाख रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 3.48 लाख रुपये प्रति टन था. यानी कम मात्रा में भी ज्यादा आमदनी संभव हो पाई.
अरेबिका कॉफी की चमक
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, अरेबिका किस्म की कॉफी ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया. अरेबिका पार्चमेंट कॉफी का निर्यात 5.5 प्रतिशत बढ़कर 38,326 टन पहुंच गया. वहीं अरेबिका चेरी कॉफी में तो जबरदस्त उछाल देखने को मिला और इसका निर्यात 47 प्रतिशत बढ़कर 11,775 टन हो गया. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम क्वालिटी और बेहतर प्रोसेसिंग के चलते भारतीय अरेबिका को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से ज्यादा तवज्जो मिली.
रोबस्टा में मिला-जुला रुझान
रोबस्टा कॉफी के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग रही. भारतीय रोबस्टा पार्चमेंट कॉफी, जिसे लंदन टर्मिनल कीमतों पर प्रीमियम मिलता है, उसका निर्यात मामूली 1.5 प्रतिशत घटकर 24,612 टन रहा. वहीं रोबस्टा चेरी कॉफी में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका निर्यात 1.56 लाख टन पर आ गया. इसके पीछे कुछ क्षेत्रों में उत्पादन और गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों को कारण माना जा रहा है.
इंस्टेंट कॉफी का बढ़ता बाजार
इंस्टेंट कॉफी सेगमेंट ने भी भारत के निर्यात को सहारा दिया. देश में तैयार की गई इंस्टेंट कॉफी का निर्यात 12 प्रतिशत बढ़कर 46,954 टन हो गया. हालांकि री-एक्सपोर्ट की जाने वाली इंस्टेंट कॉफी में हल्की गिरावट दर्ज की गई. कुल मिलाकर इंस्टेंट कॉफी का निर्यात 2.68 प्रतिशत बढ़कर 1.53 लाख टन पहुंच गया, जो दर्शाता है कि रेडी-टू-ड्रिंक और आसान विकल्पों की मांग लगातार बनी हुई है.
इटली शीर्ष पर, रूस बना दूसरा बड़ा खरीदार
देशों के हिसाब से देखें तो इटली भारत की कॉफी का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा. हालांकि वहां निर्यात घटकर 60,688 टन रह गया, जो पिछले साल 77,890 टन था. इस गिरावट के बावजूद इटली शीर्ष स्थान पर कायम रहा. सबसे बड़ा बदलाव रूस के रूप में सामने आया. रशियन फडरेशन भारत का दूसरा सबसे बड़ा कॉफी खरीदार बनकर उभरा और उसने जर्मनी को पीछे छोड़ दिया. रूस को भारत का कॉफी निर्यात करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 31,505 टन पहुंच गया. वहीं जर्मनी को होने वाला निर्यात 32 प्रतिशत घटकर 28,840 टन रह गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक कीमतें मजबूत बनी रहीं और भारत गुणवत्ता व वैल्यू-एडेड उत्पादों पर फोकस बढ़ाता रहा, तो आने वाले वर्षों में कॉफी निर्यात और नई ऊंचाइयों को छू सकता है. रूस जैसे नए और उभरते बाजार भारत के लिए भविष्य में भी बड़े अवसर खोल सकते हैं.