Iran-Israel war: ईरान-इजरायल के बीच चल रही जंग से पूरी दुनिया प्रभावित है. गैस, डीजल और पेट्रोल के साथ-साथ खाद्य समाग्रियों के कारोबार पर असर पड़ा है. नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देश इंधन की कमी से जूझ रहे हैं. ऐसे में इंधन की कमी का असर खाद्य भंडार पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है. लेकिन भारत को खाद्य किल्लत को लेकर कोई कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है. अभी देश में जरूरत से ज्यादा 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 लाख मीट्रिक टन चावल का स्टॉक है, जो पीडीएस और आपात जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयाप्त है.
दरअसल, ये जानकारी केंद्र सरकार ने दी है. केंद्र सरकार ने कहा है कि ईरान-इजरायल जंग के बीच देश की खाद्य सुरक्षा स्थिति पर नजर रखी जा रही है. सरकार के अनुसार भारत के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार है. करीब 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 लाख मीट्रिक टन चावल का स्टॉक है, डिससे पीडीएस और आपात जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है.
15.8 लाख मीट्रिक टन चीनी के निर्यात की अनुमति
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने कहा है कि राज्यों के जरिए गेहूं की खरीद भी शुरू हो चुकी है. साथ ही उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर खाद्य तेल की आपूर्ति पर नहीं पड़ा है और इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, यूक्रेन, ब्राजील, मलेशिया और रूस जैसे देशों से आयात लगातार जारी है. वहीं, सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 15.8 लाख मीट्रिक टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई है, जिसमें से अब तक 3.73 लाख मीट्रिक टन चीनी श्रीलंका, पश्चिम एशिया और पूर्वी अफ्रीका को भेजी जा चुकी है.
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28 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक उपलब्ध है
वहीं, उपभोक्ता मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद देश में जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कोई असामान्य उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है. सरकार लगातार कीमतों पर नजर रख रही है, सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने और जमाखोरी-कालाबाजारी रोकने पर ध्यान दे रही है. उन्होंने यह भी बताया कि इस साल दालों का उत्पादन बढ़ा है और फिलहाल 28 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक उपलब्ध है.
प्याज, आलू और टमाटर का उत्पादन
सरकार ने कहा है कि प्याज, आलू और टमाटर जैसी बागवानी फसलों का उत्पादन पिछले साल के बराबर ही है, इसलिए सप्लाई की कोई बड़ी समस्या नहीं है. कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्र ने प्याज की खरीद भी शुरू कर दी है. इसके साथ ही जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी रोकने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है और 17 भाषाओं में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन शुरू की गई है, जो पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रही है.
होरमुज जलडमरूमध्य बंद होने से कारोबार प्रभावित
वहीं, पश्चिम एशिया में इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कई वैश्विक असर पड़ रहे हैं. इस वजह से होरमुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस के परिवहन का अहम रास्ता है, लगभग बंद हो गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. खास बात यह है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सिर्फ तेल और ईंधन की कीमतों तक सीमित नहीं है. इस संघर्ष के कारण परिवहन खर्च बढ़ गया है, सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कच्चे माल की लागत भी बढ़ी है. इसका असर कई उद्योगों पर पड़ा है, जिससे महंगाई बढ़ने का दबाव बना है और खासकर आयात पर निर्भर देशों में खाद्य सुरक्षा की चिंता भी बढ़ गई है.