बढ़ने के बजाए घट रहा टमाटर का रेट, इन दो राज्यों में बुरा हाल.. कहीं ईरान-इजरायल जंग तो नहीं है वजह ?
कर्नाटक के बेलुर APMC में टमाटर किसानों को अच्छा रेट नहीं मिल रहा है. 24 से 31 मार्च के दौरान इस मंडी में टमाटर की थोक कीमतें 1,191.95 रुपए प्रति क्विंटल रहीं. कहा जा रहा है कि ईरान-इजरायल जंग के चलते खाड़ी देशों में टमाटर का निर्यात प्रभावित हुआ है. विदेशों में मांग घटने के चलते घरेलू मार्केट में इसकी उपलब्धता बढ़ गई है.
Mandi Bhav: ईरान-इजरायल जंग के चलते टमाटर का होलसेल रेट काफी गिर गया है. खासकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की मंडियों में टमाटर की कीमतों में गिरावट कुछ ज्यादा ही आई है. कर्नाटक के बांगरपेट APMC में 16-23 मार्च के बीच रेट में 12 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. ऐसे में किसानों को नुकसान हो रहा है. वे लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. कई किसान सड़क किनारे अपनी उपज फेंकने को मजबूर हो गए हैं. किसानों का कहना है कि इस साल पैदावार अच्छी हुई है, पर कीमत कम होने से मुनाफा नुकसान में बदल गया. ऐसे में सरकार को टमाटर किसानों को घाटे से निकालने के लिए आर्थिक मदद करनी चाहिए.
Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक के बांगरपेट APMC में 24 से 31 मार्च के दौरान टमाटर की थोक कीमतें 720.61 रुपए प्रति क्विंटल रहीं. यह पिछले सप्ताह (16-23 मार्च ) की 819.76 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से 12.1 फीसदी कम है. खास बात यह है कि पिछले महीने (24-28 फरवरी ) की 918.03 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से भी 21.5 फीसदी घट गई है. यानी कीमतें बढ़ने के बजाए और कम ही हो रही हैं. यही वजह है कि किसान लागत नहीं निकाल पा रहे हैं.
24 से 31 मार्च के दौरान मंडी में टमाटर की थोक कीमतें
बात अगर कर्नाटक के बेलुर APMC की करें तो यहां पर भी टमाटर किसानों को अच्छा रेट नहीं मिल रहा है. 24 से 31 मार्च के दौरान इस मंडी में टमाटर की थोक कीमतें 1,191.95 रुपए प्रति क्विंटल रहीं. यह पिछले सप्ताह (16-23 मार्च ) की 1,409.83 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से 15.4 फीसदी कम है. वहीं, पिछले महीने (24-28 फरवरी ) की 1,328.21 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से 10.3 फीसदी घट गई है. हालांकि, अरासिकेरे APMC में दोनों मंडियों के मुकाबले स्थिति कुछ बेहतर रही. इस मंडी के अंदर 24 से 31 मार्च के दौरान टमाटर की थोक कीमत 1,600 रुपए प्रति क्विंटल रही. यह पिछले सप्ताह (16-23 मार्च 2026) की 1,000 रुपए प्रति क्विंटल कीमत के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा है.
- Mandi Bhav: 1 रुपये किलो हुआ टमाटर, किसानों को भारी नुकसान.. आखिर रेट में क्यों आई गिरावट?
- ब्लैक थ्रिप्स से आम की फसल प्रभावित.. उत्पादन कम होने से कीमतों में बढ़ोतरी, 23000 रुपये क्विंटल रेट
- देश में 180 लाख टन से ज्यादा है खाद का स्टॉक, खरीफ सीजन में उर्वरक आपूर्ति को लेकर केंद्र ने बनाई रणनीति
- सरसों के उत्पादन में 3.64 फीसदी की बढ़ोतरी, राजस्थान पहले स्थान पर.. जानें MP, यूपी, हरियाणा का हाल
नोट: आंकड़े Agmarknet से लिए गए हैं
| मंडी (APMC) | 24–31 मार्च कीमत (₹/क्विंटल) | पिछले हफ्ते की कीमत (₹/क्विंटल) | बदलाव (%) | पिछले महीने की कीमत (₹/क्विंटल) | बदलाव (%) | खास बात |
|---|---|---|---|---|---|---|
| बांगरपेट (कर्नाटक) | 720.61 | 819.76 | ↓ 12.1% | 918.03 | ↓ 21.5% | लगातार गिरावट, किसान लागत नहीं निकाल पा रहे |
| बेलुर (कर्नाटक) | 1,191.95 | 1,409.83 | ↓ 15.4% | 1,328.21 | ↓ 10.3% | यहां भी कीमतों में गिरावट |
| अरासिकेरे (कर्नाटक) | 1,600 | 1,000 | ↑ 60% | — | — | बाकी मंडियों से बेहतर स्थिति |
| कालिकिरी (आंध्र प्रदेश) | 940.12 | 991.14 | ↓ 5.2% | 1,011.23 | ↓ 7% | पिछले साल से हल्की बढ़त (0.2%) |
| मदनपल्ली (आंध्र प्रदेश) | 1,135.48 | 1,266.25 | ↓ 10.3% | 1,222.53 | ↓ 7.1% | कीमतों में लगातार गिरावट |
किस मंडी में कितनी है टमाटर की कीमत
बात अगर आंध्र प्रदेश के कालिकिरी APMC की करें तो यहां पर 24 से 31 मार्च के दौरान टमाटर की थोक कीमतें 940.12 रुपए प्रति क्विंटल रहीं. यह पिछले सप्ताह (16-23 मार्च ) की 991.14 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से 5.2 फीसदी कम है और पिछले महीने (24-28 फरवरी ) की 1,011.23 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से 7 फीसदी कम है. खास बात यह है कि इस मंडी में पिछले साल इसी समय (24-31 मार्च 2025) कीमत 938.05 रुपए प्रति क्विंटल थी. यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार कीमतों में 0.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. Agmarknet के अनुसार, मदनपल्ली APMC में 24-31 मार्च के दौरान टमाटर की थोक कीमत 1,135.48 रुपए प्रति क्विंटल रही. यह पिछले सप्ताह (16-23 मार्च ) की 1,266.25 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से 10.3 फीसदी कम है. वहीं, पिछले महीने (24-28 फरवरी ) की 1,222.53 रुपए प्रति क्विंटल कीमत से 7.1 फीसदी घट गई है.
इस वजह से कीमतों में आ रही गिरावट
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान-इजरायल जंग के चलते खाड़ी देशों में टमाटर का निर्यात प्रभावित हुआ है. विदेशों में मांग घटने के चलते घरेलू मार्केट में इसकी उपलब्धता बढ़ गई है. इसके चलते कीमतों में लगातार गिरावट जारी है. फरवरी महीने के मुकाबले मार्च में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की अधिकांश मंडियों में टमाटर का रेट कम हो गया. ऐसे में कर्नाटक के टमाटर किसान अपनी फसल को फेंकने या पशुओं के चारे के लिए भेजने पर मजबूर हो गए हैं. जंबुनाथन हली और रायरा केरे जैसे इलाकों में ट्रैक्टर-भर टमाटर भेड़ों और बकरियों के पिंजरे में डालकर चारे के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि किसान हर दिन एपीएमसी यार्ड से आसपास के मवेशी पालन केंद्रों तक कई ट्रैक्टर-लोड टमाटर भेज रहे हैं, ताकि फसल पूरी तरह बेकार न हो. स्थिति इसलिए भी खराब हुई है क्योंकि होटल और प्रसंस्करण उद्योगों की मांग घट गई है, जिससे टमाटर की खरीदी और प्रोसेसिंग काफी धीमी हो गई है.