ईरान-इजरायल युद्द से अंडा कारोबार प्रभावित, कीमतों में गिरावट.. 2 रुपये पीस हो रहा नुकसान

ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भारत के अंडा निर्यात पर असर पड़ा है. खाड़ी देशों ने ऑर्डर रद्द कर दिए, जिससे घरेलू बाजार में अंडों की आपूर्ति बढ़ गई और कीमतें गिरकर 3.30 से 3.50 रुपये तक पहुंच गईं. इससे दक्षिण भारत के पोल्ट्री किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 11 Mar, 2026 | 12:57 PM

Egg Price Fall: ईरान-इजरायल युद्द के चलते पश्चिम एशिया में अशांति की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इससे न कवल बासमती का कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि अब युद्ध का असर दक्षिण भारत के पोल्ट्री सेक्टर पर भी पड़ने लगा है. इससे अंडों की कीमतें अचानक गिर गई हैं. खासकर आंध्र प्रदेश के तिरुपति, चित्तूर और अन्नमय्या जिले के अंदर कीमतों में कुछ ज्यादा ही गिरावट आई है. इससे पोल्ट्री किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है. चित्तूर क्षेत्र देश में अंडा उत्पादन का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, जबकि पहला स्थान तमिलनाडु के नमक्कल क्षेत्र का है. अंडा उत्पादक किसानों का कहना है कि आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार को कुछ फैसले लेने चाहिए.

पोल्ट्री उद्योग से जुड़े सूत्रों ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि भारत हर दिन करीब एक करोड़ अंडे यूएई, ओमान, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों को निर्यात करता है. लेकिन पिछले एक हफ्ते में इन देशों के आयातकों ने भारत से अंडों के ऑर्डर रद्द  कर दिए हैं, जिससे मध्य पूर्व के लिए होने वाला निर्यात पूरी तरह रुक गया है. इन अंडों का बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों से भेजा जाता है.

थोक बाजारों में कीमत 3.50 रुपये प्रति अंडा तक गिर गई है

पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति के कारण कार्गो जहाजों और हवाई मार्गों में बाधा आ गई है, जिससे वहां होने वाला निर्यात काफी धीमा  हो गया है. इसके चलते बड़ी मात्रा में अंडे देश के घरेलू बाजार में आ रहे हैं और आपूर्ति बढ़ने से अंडों की कीमतों में तेज गिरावट आ गई है. नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के अनुसार अंडे की कीमत करीब 4.20 रुपये प्रति अंडा रह गई है, जबकि कई थोक बाजारों में यह 3.30 से 3.50 रुपये प्रति अंडा तक गिर गई है.

अंडा तैयार करने की औसत लागत करीब 4.50 रुपये आती है

पोल्ट्री किसानों का कहना है कि एक अंडा तैयार करने की औसत लागत करीब 4.50 रुपये आती है, इसलिए उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है. नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य वी. रमेश ने कहा कि युद्ध की स्थिति के कारण अंडों की ढुलाई भी मुश्किल हो गई है और पोल्ट्री फीड की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है.

हर अंडे पर करीब 1.50 से 2 रुपये तक का नुकसान हो रहा है

पूर्व चित्तूर जिले में पोल्ट्री उद्योग काफी बड़ा है. लेकिन निर्यात ऑर्डर अचानक रुक जाने से यहां के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि पोल्ट्री फीड के कच्चे माल की कीमत बढ़ने से उनका खर्च और बढ़ गया है. पुथलापट्टू के पोल्ट्री किसान एन. चंद्रशेखर के अनुसार पिछले एक हफ्ते से किसानों को हर अंडे पर करीब 1.50 से 2 रुपये तक का नुकसान हो रहा है.

इस क्षेत्र में अंडा उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाती हैं

जिले में हैचरी के अलावा सैकड़ों व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म भी हैं, जो मुख्य रूप से पालमनेर, गंगावरम, पुंगनूर, मदनपल्ले, पुत्तूर, नगरी और आसपास के मंडलों में स्थित हैं. यह इलाका राज्य के प्रमुख पोल्ट्री उत्पादन क्षेत्रों में से एक माना जाता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले के पोल्ट्री फार्म और हैचरी में मिलाकर 48 लाख से ज्यादा लेयर मुर्गियां हैं, जो इस क्षेत्र में अंडा उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाती हैं.

बासमती चावल के कई जहाज समुद्र में ही फंसे हुए हैं

बता दें कि सबसे पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर कृषि निर्यात पर पड़ा था. खासकर बासमती चावल का कारोबार प्रभावित हुआ है. बीते दिनों खबर सामने आई थी कि अनुमान है कि करीब 60-70 हजार टन भारतीय बासमती चावल  खाड़ी देशों के लिए भेजा जा चुका है, लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण कई जहाज समुद्र में ही फंसे हुए हैं. कुछ जहाज ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के पास रुके हैं, जबकि कुछ को अपना रास्ता बदलना पड़ा है.

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Published: 11 Mar, 2026 | 12:55 PM
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