Agriculture News: बजट 2026 पेश होने से पहले केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों किसानों को बहुत बड़ा गिफ्ट दिया है. अब 40 किलो वाले सल्फर युक्त यूरिया का बैग 254 रुपये में मिलेगा. खास बात यह है कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है. अधिसूचना में कहा गया है कि सल्फर युक्त यूरिया के अधिकतम मूल्य को 254 रुपये प्रति 40 किलोग्राम बैग तय किया है. यह फैसला 1985 के उर्वरक (नियंत्रण) आदेश के तहत लिया गया है और आदेश जारी होने के दिन से लागू है.
यह तय कीमत चाय, कॉफी और रबर बागानों के साथ-साथ अन्य किसानों के लिए भी लागू होगी, चाहे उर्वरक डीलर, निर्माता, आयातक या पूल हैंडलिंग एजेंसी बेचें. मंत्रालय का कहना है कि इसका मकसद किसानों को निश्चित और नियंत्रित दर पर यूरिया उपलब्ध कराना है. सरकार ने कहा है कि तय अधिकतम मूल्य में जीएसटी या अन्य केंद्रीय/स्थानीय कर शामिल नहीं हैं. अगर ये लागू हों, तो अलग से लगाए जा सकते हैं.
5 रुपये अतिरिक्त चार्ज लिया जा सकता है
बड़ी बात यह है कि छोटे पैकेज वाली यूरिया थैलियों के लिए डीलरों को अतिरिक्त पैकिंग चार्ज लेने की अनुमति है. उदाहरण के लिए, 2 किलो के पैक पर 1.50 रुपये, 5 किलो पर 2.25 रुपये, 10 किलो पर 3.50 रुपये और 25 किलो पैक पर 5 रुपये अतिरिक्त चार्ज लिया जा सकता है. यह अधिसूचना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने जारी की है, और इसके संयुक्त सचिव फ्रैंकलिन एल. खोबंग के हस्ताक्षर हैं.
यह नाइट्रोजन की क्षमता बढ़ाता है
बता दें कि सल्फर युक्त यूरिया का इस्तेमाल किसान तिलहन, दलहन और अनाज फसलों के लिए कर सकते हैं. यह नाइट्रोजन की क्षमता बढ़ाता है, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है और तेल व प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है. इसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, गेहूं, धान और मक्का में इस्तेमाल किया जा सकता है. प्याज, लहसुन, टमाटर और अन्य बागवानी फसलों में भी लाभकारी है. यह धीरे-धीरे पोषक तत्व छोड़ता है, नाइट्रोजन की हानि कम करता है और पैदावार बढ़ाता है. इसे बुवाई के समय या खड़ी फसलों में इस्तेमाल करना सबसे उपयुक्त माना जाता है.
इन फसलों के लिए भी है लाभकारी
इसके अलावा सल्फर युक्त यूरिया कम लागत और कम मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे बार-बार उर्वरक डालने की मेहनत और खर्च कम हो जाता है. यह मिट्टी की सेहत भी सुधारता है, खासकर क्षारीय मिट्टी को अम्लीय बनाकर मृदा गुणवत्ता बढ़ाता है. धान, मक्का और अन्य फसलों में इसका उपयोग विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है.