Goat Farming: इन 5 नस्लों से शुरू करें बकरी पालन बिजनेस, कम लागत में होगा जबरदस्त मुनाफा

खेती के साथ कमाई बढ़ाने का बेहतरीन जरिया बनता जा रहा है बकरी पालन. कम लागत, आसान देखभाल और दूध-मांस की बढ़ती मांग ने इसे मुनाफे का बिजनेस बना दिया है. सही नस्ल का चुनाव कर किसान कम समय में अच्छी आमदनी कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 31 Jan, 2026 | 07:30 PM

Goat Farming : आज के समय में खेती के साथ-साथ अगर कोई काम किसानों की किस्मत बदल रहा है, तो वह है बकरी पालन. कम जमीन, कम खर्च और जल्दी कमाई-यही वजह है कि बकरी पालन अब सिर्फ परंपरागत काम नहीं रहा, बल्कि एक स्मार्ट बिजनेस मॉडल बन चुका है. गांव से लेकर शहर तक बकरी के दूध और मांस की मांग तेजी से बढ़ रही है. सही नस्ल चुन ली जाए, तो किसान सालभर अच्छी आमदनी कर सकते हैं.

सिरोही नस्ल- गर्म इलाकों की सबसे भरोसेमंद बकरी

सिरोही नस्ल राजस्थान की पहचान मानी जाती है, लेकिन आज यह पूरे देश में लोकप्रिय हो चुकी है. यह बकरी खासतौर पर मांस उत्पादन के लिए जानी जाती है. इसका औसत वजन 40 से 50 किलो तक होता है और बाजार में इसका मांस अच्छे दामों पर बिकता है. सिरोही बकरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गर्मी सहन करने में माहिर होती है. कम चारे में भी अच्छी ग्रोथ करती है और बीमारियां भी कम लगती हैं. राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और मध्य भारत के किसान इसे बड़े स्तर पर पाल रहे हैं.

जमुनापारी नस्ल- दूध और ब्रीडिंग का शानदार कॉम्बिनेशन

उत्तर प्रदेश की जमुनापारी बकरी  को यूं ही बकरियों की गाय नहीं कहा जाता. इसका कद ऊंचा, शरीर मजबूत और दूध देने की क्षमता जबरदस्त होती है. ये बकरी रोजाना करीब 2 से 3 लीटर दूध देती है, जो घरेलू उपयोग के साथ बाजार में भी अच्छे दाम पर बिकता है. साथ ही, जमुनापारी नस्ल ब्रीडिंग के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. अगर कोई किसान डेयरी के साथ बकरी पालन करना चाहता है, तो यह नस्ल एक बेहतरीन विकल्प है.

सानन नस्ल- दूध उत्पादन में नंबर वन

सानन नस्ल स्विट्जरलैंड से आई है और इसे दुनिया की सबसे अच्छी डेयरी बकरी माना जाता है. यह बकरी रोजाना 3 से 4 लीटर तक दूध दे सकती है. हालांकि, ये नस्ल ज्यादा गर्म इलाकों के लिए उपयुक्त नहीं है. ठंडे या सामान्य मौसम वाले क्षेत्रों में इसका पालन ज्यादा सफल रहता है. अगर किसान आधुनिक तरीके से डेयरी बकरी पालन करना चाहते हैं, तो सानन नस्ल से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.

बरबरी नस्ल- छोटे किसानों के लिए सबसे सही

बरबरी नस्ल  उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत में काफी पसंद की जाती है. यह आकार में छोटी होती है, लेकिन फायदे बड़े देती है. ये बकरी 1.5 से 2 लीटर दूध रोजाना देती है और मांस के लिए भी उपयोगी है. इसकी खास बात यह है कि इसे कम जगह, कम चारा और कम खर्च में पाला जा सकता है. छोटे और सीमांत किसान इस नस्ल से बिना ज्यादा निवेश के अच्छी कमाई कर सकते हैं.

ओस्मानाबादी नस्ल- मांस के बाजार की पहली पसंद

ओस्मानाबादी बकरी  महाराष्ट्र, राजस्थान और दक्षिण भारत के गर्म इलाकों में खूब पाली जाती है. यह नस्ल खास तौर पर मांस उत्पादन के लिए जानी जाती है. इसका वजन करीब 35 से 45 किलो तक होता है और इसका मांस बाजार में ऊंचे दामों पर बिकता है. इसके साथ ही, इस नस्ल की बकरियां रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी मजबूत होती हैं, जिससे इलाज पर खर्च कम आता है और मुनाफा ज्यादा होता है.

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Published: 31 Jan, 2026 | 07:30 PM

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