आंध्र प्रदेश के बाद कर्नाटक में भी अंडा हुआ सस्ता, इस वजह से कीमतों में गिरावट.. 4 रुपये पीस रेट

भारत में फिलहाल कुछ एग पाउडर प्लांट हैं, जिनमें नामक्कल, मुंबई और कोलार जिले के मलुर की सुविधाएं शामिल हैं. सिर्फ मलुर प्लांट ही हर दिन करीब 12 लाख अंडों को प्रोसेस करता है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से एग पाउडर का निर्यात भी फिलहाल धीमा पड़ गया है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 13 Mar, 2026 | 04:38 PM

Egg Price Fall: आंध्र प्रदेश के बाद कर्नाटक में भी पिछले कुछ हफ्तों में अंडों की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई है. नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के अनुसार, अंडे की कीमत 7.06 रुपये प्रति पीस से घटकर लगभग 4.60 रुपये प्रति पीस रह गई है. इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई किसानों को कहना है कि कीमत में गिरावट आने के चलते वे लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. कहा जा रहा है कि ईरान-इजराइल जंग के चलते अंडा निर्यात में गिरावट आई है. इसके चलते कीमतें कम हो गईं.

NECC के सेल्स प्रमोशन ऑफिसर वी. शेषनारायण ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि पिछले 15 दिनों में कई कारणों से कीमतें गिरी हैं. इनमें खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में रुकावट, मौसम के अनुसार मांग में बदलाव और धार्मिक आयोजनों के कारण खपत में कमी  शामिल है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक में हर दिन करीब 2.2 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है. इसमें होसपेटे सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र है, इसके बाद मैसूर का स्थान आता है. कर्नाटक में उत्पादित अंडों को निर्यात के लिए तमिलनाडु के नामक्कल स्थित प्लांट में भेजा जाता है.

4.7 लाख अंडों वाला एक कंटेनर बीच रास्ते वापस लौटा

उन्होंने याद दिलाया कि युद्ध के शुरू होने वाले दिन मैसूरु से नामक्कल जा रहे 4.7 लाख अंडों वाला एक कंटेनर बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा, क्योंकि निर्यात प्रभावित हो गया था. उन्होंने कहा कि सामान्यत: नामक्कल से हर दिन करीब 70 लाख से 1 करोड़ अंडों की खेप खाड़ी देशों में निर्यात  की जाती है. लेकिन चल रहे युद्ध के कारण अब निर्यात पूरी तरह रुक गया है.

अंडों की खपत भी कम हो गई है

रामजान, ईस्टर और गर्मियों की शुरुआत के कारण अंडों की खपत भी कम हो गई है, क्योंकि परंपरागत तौर पर इन समयों में अंडों की मांग घट जाती है. इसके कारण बेंगलुरु और मैसूर जैसे शहरों में अंडों की कीमतें गिर गई हैं. शेषनारायण के अनुसार, कर्नाटक के ज्यादातर हिस्सों में इसी तरह के दाम देखने को मिल रहे हैं, हालांकि होसपेटे जैसे स्थानों में कीमतें करीब 60 पैसे कम हैं.

बची हुई खेप को कोल्ड स्टोरेज में रख रहे हैं

कीमतें गिरने के बावजूद अंडों का उत्पादन जारी है, जिससे स्टॉक बढ़ रहा है. उत्पादक बची हुई खेप को कोल्ड स्टोरेज में रख रहे हैं, जहां अंडों को तीन महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है. कुछ अतिरिक्त अंडों को एग पाउडर में भी बदला जा रहा है, जिसका शेल्फ लाइफ तीन से चार महीने का होता है और इसे उन देशों में निर्यात किया जाता है, जहां ताजा अंडे आसानी से उपलब्ध नहीं हैं.

एग पाउडर का निर्यात भी कम हो गया है

भारत में फिलहाल कुछ एग पाउडर प्लांट हैं, जिनमें नामक्कल, मुंबई और कोलार जिले के मलुर की सुविधाएं शामिल हैं. सिर्फ मलुर प्लांट ही हर दिन करीब 12 लाख अंडों को प्रोसेस करता है. शेषनारायण ने कहा कि चल रहे अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से एग पाउडर का निर्यात भी फिलहाल धीमा पड़ गया है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर हर अप्रैल में मौसमी कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, लेकिन इस साल विदेशी बाजारों में रुकावट के कारण इसका असर खासा बढ़ गया है.

आंध्र प्रदेश में भी कीमतों में गिरावट

बता दें कि खाड़ी देशों में जंग के चलते केवल कर्नाटक में ही अंडा सस्ता नहीं हुआ है, बल्कि आंध्र प्रदेश के तिरुपति, चित्तूर और अन्नमय्या जिले के अंदर कीमतों में कुछ ज्यादा ही गिरावट आई है. इससे पोल्ट्री किसानों पर आर्थिक दबाव  बढ़ गया है. चित्तूर क्षेत्र देश में अंडा उत्पादन का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, जबकि पहला स्थान तमिलनाडु के नमक्कल क्षेत्र का है. अंडा उत्पादक किसानों का कहना है कि आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार को कुछ फैसले लेने चाहिए.

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Published: 13 Mar, 2026 | 04:34 PM
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