Supreme Court MSP Case: देशभर के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर चल रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है. ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने स्वामीनाथन आयोग के C2+50 फीसदी फार्मूले के आधार पर सभी अधिसूचित फसलों पर कानूनी रूप से लागू MSP की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. अदालत ने इस याचिका को पहले से लंबित एक समान मामले के साथ जोड़ते हुए संयुक्त सुनवाई का फैसला किया है. याचिका में केवल कानूनी MSP ही नहीं, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए कर्ज राहत, संस्थागत ऋण, फसल खरीद और सिंचाई जैसी कई अहम मांगें भी उठाई गई हैं.
स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले पर कानूनी MSP की मांग
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व लोकसभा सांसद वी. शोभनाद्रीश्वर राव (V Sobhanadreeswara Rao) द्वारा दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि सभी अधिसूचित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून का दर्जा दिया जाए. एमएस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट (2006) में यह सिफारिश की गई थी. याचिकाकर्ता का तर्क है कि MSP का निर्धारण खेती की वास्तविक लागत (C2) पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर किया जाए, जैसा स्वामीनाथन आयोग ने सिफारिश की थी. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समान प्रकृति के लंबित मामलों की एक साथ सुनवाई होगी.
किसानों के लिए कर्ज राहत और सस्ती संस्थागत वित्त व्यवस्था की मांग
याचिका में छोटे और सीमांत किसानों के लिए समयबद्ध कर्ज राहत तंत्र बनाने की भी मांग की गई है. इसमें फसल संकट से प्रभावित किसानों के लिए एकमुश्त कृषि ऋण माफी तथा निजी साहूकारों पर निर्भरता कम करने के लिए संस्थागत ऋण तक समान और पर्याप्त पहुंच सुनिश्चित करने की बात कही गई है. इसके साथ ही केंद्र सरकार से केरल किसान ऋण राहत आयोग अधिनियम की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने पर विचार करने का अनुरोध भी किया गया है.
MSP से नीचे खरीद पर रोक लगाने की भी अपील
याचिकाकर्ता चाहते हैं कि केंद्र सरकार एक वैधानिक ढांचा तैयार करे, जिससे कोई भी अधिसूचित कृषि उपज MSP से कम कीमत पर खरीदी न जा सके. इसके अलावा पीएम-आशा, प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS), मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) और प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) जैसी योजनाओं को मजबूत करने की मांग भी की गई है. याचिका में किरायेदार किसानों को कानूनी पहचान, फसल ऋण, बीमा और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए मॉडल कृषि भूमि पट्टा कानून में संशोधन की भी मांग उठाई गई है.
महाराष्ट्र के किसानों की याचिका भी पहले से लंबित
ट्रिब्यून के अनुसार, इससे पहले अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के तीन किसानों की याचिका पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा था. उस याचिका में मांग की गई थी कि MSP का निर्धारण राज्यों द्वारा प्रस्तुत वास्तविक उत्पादन लागत के भारित औसत (C2) के आधार पर किया जाए और उसी मूल्य पर सभी अधिसूचित फसलों की सुनिश्चित सरकारी खरीद हो. इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि उत्पादन लागत न मिलने से किसान गहरे आर्थिक संकट में हैं, महाराष्ट्र में पांच वर्षों में 17,000 से अधिक आत्महत्याएं हुईं. अब दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई से कानूनी MSP पर राष्ट्रीय स्तर की बहस और तेज होने की संभावना है.