खेती के साथ डबल कमाई का मौका, सोलर रूफिंग बदल देगी किसाने के मुनाफे का गणित

खेतों और ग्रामीण इमारतों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाकर किसान बिजली उत्पादन के साथ अतिरिक्त आय कमा सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत सोलर रूफिंग, सरकारी योजनाएं और आधुनिक तकनीक खेती को टिकाऊ बनाने के साथ नेट जीरो लक्ष्य में भी अहम भूमिका निभाएंगी.

नोएडा | Updated On: 25 Jul, 2026 | 12:22 PM

Solar Roofing: भारत में खेती केवल खाद्यान्न उत्पादन का आधार नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है. लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और बदलते मौसम किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों और ग्रामीण इलाकों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाकर खेती को अधिक टिकाऊ और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ किसानों की आय बढ़ाने और देश के नेट जीरो 2070 लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिल सकती है.

खेती और स्वच्छ ऊर्जा का मजबूत संयोजन

भारत की करीब 60 प्रतिशत भूमि कृषि कार्यों में उपयोग होती है. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या  में घर, गोदाम, डेयरी शेड और कृषि ढांचे मौजूद हैं, जिनकी छतों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन छतों पर मजबूत और टिकाऊ सोलर रूफिंग सिस्टम विकसित किए जाएं, तो किसानों को अपनी जरूरत की बिजली मिलने के साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर आय का नया स्रोत भी मिल सकता है. सोलर रूफिंग से सिंचाई, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज और कृषि मशीनों के संचालन में भी स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, जिससे डीजल और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हो सकती है.

देश में सौर ऊर्जा की बड़ी संभावनाएं

बिजनेस लाइन के अनुसार, भारत में एग्री-फोटोवोल्टाइक (Agri-Photovoltaics) की तकनीकी क्षमता 3,156 गीगावॉट से 13,803 गीगावॉट के बीच आंकी गई है. यह देश की मौजूदा कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता  से कई गुना अधिक है. सरकार की पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत अब तक 10,203 मेगावॉट से अधिक कृषि सौर क्षमता स्थापित की जा चुकी है. वहीं पीएम सूर्य घर योजना के तहत वर्ष 2025 में 14.43 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि देश में सौर ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है.

मजबूत छत होगी सफलता की सबसे बड़ी शर्त

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सोलर पैनल लगाना  ही पर्याप्त नहीं होगा. जिन छतों पर ये सिस्टम लगाए जाएंगे, उनका मजबूत, सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ होना भी जरूरी है. यदि रूफिंग सिस्टम गुणवत्ता वाले होंगे, तो सोलर पैनल अधिक समय तक बेहतर प्रदर्शन करेंगे और रखरखाव का खर्च भी कम रहेगा. इसके साथ ही ऐसी संरचनाएं किसानों को तेज धूप, बारिश और बदलते मौसम से भी अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं, जिससे कृषि गतिविधियां अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बन सकेंगी.

नेट जीरो लक्ष्य के साथ किसानों की आय बढ़ाने का अवसर

भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की भागीदारी  बेहद महत्वपूर्ण होगी. खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का विस्तार न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करेगा, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने का प्रभावी साधन भी बनेगा. यदि मजबूत बुनियादी ढांचे, बेहतर वित्तीय सहायता और प्रभावी नीतियों के साथ इस दिशा में काम किया जाए, तो आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है. इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेगी.

Published: 25 Jul, 2026 | 12:19 PM

Topics: