तिलहन किसानों के लिए अच्छी खबर, बेहतर दामों से बढ़ा किसानों का उत्साह, खरीफ में रकबा बढ़ने के आसार
Soybean Price Surge: खरीफ सीजन शुरू होने से पहले सोयाबीन और मूंगफली के दाम बढ़ने से किसानों में उत्साह बढ़ गया है. पिछले साल के मुकाबले इन फसलों की कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों को बेहतर कमाई की उम्मीद है. इसी वजह से कई राज्यों में किसान सोयाबीन, मूंगफली और सूरजमुखी जैसी तिलहन फसलों की खेती का रकबा बढ़ा रहे हैं.
Edible Oil Demand: खरीफ सीजन 2026-27 की बुवाई शुरू होने से पहले किसानों को बाजार से अच्छी खबर मिल रही है. सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख तिलहन फसलों के दाम पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर हो गए हैं. यही वजह है कि कई राज्यों के किसान इस बार इन फसलों की खेती बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद किसानों का उत्साह बढ़ा रही है और तिलहन खेती को नई रफ्तार मिल सकती है.
सोयाबीन के दाम में आई बड़ी तेजी
सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए मौजूदा बाजार भाव काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून 2026 को इंदौर मंडी में सोयाबीन का भाव करीब 68,000 रुपये प्रति टन पहुंच गया. पिछले साल इसी समय इसकी कीमत लगभग 43,396 रुपये प्रति टन थी. सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,708 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. मौजूदा बाजार भाव एमएसपी से अधिक होने के कारण किसानों को फसल बेचने पर बेहतर लाभ मिलने की संभावना बन रही है.
मूंगफली किसानों को भी मिल रहे बेहतर दाम
मूंगफली उगाने वाले किसानों के लिए भी अच्छी खबर है. गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में 5 जून तक मूंगफली का भाव करीब 72,000 रुपये प्रति टन पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह लगभग 53,720 रुपये प्रति टन था. हालांकि मौजूदा कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आसपास है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले कीमतों में आई इस बढ़ोतरी से किसानों का उत्साह बढ़ा है. बेहतर दाम मिलने की उम्मीद को देखते हुए कई किसान इस बार मूंगफली की खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. इससे आने वाले सीजन में मूंगफली की बुवाई बढ़ सकती है.
कई राज्यों में बढ़ रही बीजों की मांग
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के अनुसार, देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में सोयाबीन की खेती बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. कर्नाटक के कई जिलों में बुवाई शुरू हो चुकी है और किसानों के बीच बीज खरीदने की मांग तेजी से बढ़ रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून सामान्य रहता है तो इस बार सोयाबीन उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
गुजरात में तेजी से बढ़ी मूंगफली की बुवाई
गुजरात में मूंगफली की खेती को लेकर किसानों का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है. कृषि विभाग के अनुसार 8 जून तक राज्य में 55,788 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 31,110 हेक्टेयर था. यह बढ़ोतरी बताती है कि बेहतर दाम मिलने की उम्मीद किसानों को तिलहन फसलों की ओर आकर्षित कर रही है.
सूरजमुखी की खेती को भी मिल सकता है फायदा
तिलहन फसलों के बेहतर बाजार भाव का असर सूरजमुखी की खेती पर भी पड़ सकता है. सरकार ने सूरजमुखी का एमएसपी 8,343 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. इससे किसानों को न्यूनतम मूल्य का भरोसा मिलेगा और वे इस फसल की खेती बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तिलहन फसलों का रकबा बढ़ता है तो इससे देश में खाद्य तेल उत्पादन में सुधार होगा.
खाद्य तेल आयात कम करने का अवसर
भारत खाद्य तेलों के आयात पर बड़ी मात्रा में निर्भर है. ऐसे में अगर किसान अधिक क्षेत्र में सोयाबीन, मूंगफली और सूरजमुखी जैसी फसलों की खेती करते हैं, तो घरेलू उत्पादन बढ़ सकता है. इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और देश की आयात निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी. कुल मिलाकर, बेहतर बाजार भाव और सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य ने तिलहन फसलों के प्रति किसानों का भरोसा बढ़ाया है. अगर मौसम अनुकूल रहा, तो खरीफ सीजन 2026-27 तिलहन किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है.