टमाटर को लग सकती है ‘अल नीनो’ की नजर, SBI रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, इस साल मानसून सामान्य से कम रह सकता है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश लगभग 92 फीसदी रहने का अनुमान है, जो ‘सामान्य से कम’ माना जाता है. अगर ऐसा होता है, तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है और उत्पादन भी घट सकता है.
El Nino impact agriculture: भारत में खाने-पीने की चीजों की कीमतें हमेशा आम लोगों की चिंता का बड़ा कारण रहती हैं. खासकर टमाटर, प्याज और आलू जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों में थोड़ा सा बदलाव भी सीधे घर के बजट को प्रभावित करता है. अब एक नई रिपोर्ट ने बताया हैं कि आने वाले समय में टमाटर की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका कारण अल-नीनो (El Niño) जैसे मौसमीय बदलाव को माना जा रहा है.
भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर देश में अल नीनो का असर बढ़ता है, तो टमाटर महंगे हो सकते हैं. टमाटर, प्याज और आलू को मिलाकर ‘TOP’ कहा जाता है और ये तीनों मिलकर खाद्य महंगाई को काफी हद तक प्रभावित करते हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहां प्याज और आलू की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, वहीं टमाटर की कीमतें मौसम के बदलाव के साथ तेजी से ऊपर जा सकती हैं.
आखिर क्या होता है अल-नीनो?
अल नीनो एक मौसमीय घटना है, जो समुद्र के तापमान में बदलाव के कारण होती है. इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है. भारत में यह आमतौर पर मानसून को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश कम होती है. जब बारिश कम होती है, तो फसलों की पैदावार घटती है. खासकर टमाटर जैसी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों पर इसका ज्यादा असर पड़ता है. यही वजह है कि इनकी कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं.
कम बारिश से खेती पर असर
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, इस साल मानसून सामान्य से कम रह सकता है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश लगभग 92 फीसदी रहने का अनुमान है, जो ‘सामान्य से कम’ माना जाता है. अगर ऐसा होता है, तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है और उत्पादन भी घट सकता है. इससे बाजार में सब्जियों की सप्लाई कम हो जाएगी और कीमतें बढ़ेंगी.
महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर
टमाटर जैसी सब्जियों की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरे देश की महंगाई दर भी प्रभावित होती है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौसम का असर ज्यादा रहा, तो 2027 में महंगाई 4.5 फीसदी से ऊपर जा सकती है. पहले से ही आयातित महंगाई करीब 6.49 फीसदी पर है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
अर्थव्यवस्था पर कितना असर?
अच्छी बात यह है कि सिर्फ अल नीनो का असर देश की आर्थिक वृद्धि (GDP) पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा. लेकिन अगर इसके साथ सूखा भी पड़ता है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. ऐसे में GDP में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जो मध्यम स्थिति में लगभग 0.20 फीसदी और गंभीर स्थिति में 0.65 फीसदी तक हो सकती है.
खेती में बदलाव से मिल सकती है राहत
पिछले कुछ वर्षों में भारत में कृषि के साथ जुड़े अन्य क्षेत्रों जैसे डेयरी और पशुपालन का योगदान बढ़ा है. इससे किसानों की आय के अलग-अलग स्रोत बने हैं, जो जोखिम को थोड़ा कम करते हैं. इसके अलावा बागवानी (हॉर्टिकल्चर) क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे सब्जियों और फलों की उपलब्धता बढ़ी है.
सरकार के कदम से कुछ राहत
सरकार ने कुछ जरूरी उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी में छूट दी है, जिससे उत्पादन लागत कम हो सकती है. इससे महंगाई को नियंत्रित करने में थोड़ी मदद मिल सकती है. हालांकि, अगर मौसम की स्थिति ज्यादा खराब होती है, तो इन उपायों का असर सीमित रह सकता है.