बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की फसल पर संकट, कई राज्यों में 6-8 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका

तेज हवा के कारण करीब 60 प्रतिशत फसल खेत में ही गिर गई. ऐसे हालात में कुछ राज्यों में 6 से 8 प्रतिशत तक फसल नुकसान हो सकता है. हालांकि यह नुकसान हर जगह समान नहीं होगा, बल्कि उन इलाकों में ज्यादा असर दिखेगा जहां बारिश से पहले सिंचाई की गई थी और तेज हवाएं चलीं.

नई दिल्ली | Published: 24 Mar, 2026 | 07:31 AM

देश में इस समय गेहूं की फसल पककर तैयार होने की स्थिति में है, लेकिन अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कई राज्यों में हुई बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गेहूं उत्पादन पर असर पड़ सकता है, वहीं किसानों को फसल की गुणवत्ता को लेकर भी डर सता रहा है.

खेतों में गिरी फसल, किसानों की बढ़ी परेशानी

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बारिश और तेज हवा का असर साफ देखने को मिला है. कई जगहों पर फसल जमीन पर गिर गई है, जिसे किसान “लॉजिंग” कहते हैं.

किसानों का कहना है कि बारिश से ठीक पहले उन्होंने सिंचाई की थी, लेकिन तेज हवा के कारण करीब 60 प्रतिशत फसल खेत में ही गिर गई. ऐसे हालात में अगर धूप नहीं निकली, तो उत्पादन में 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. गिरे हुए गेहूं के पौधों में पानी भर जाने से दाने की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है, जिससे किसानों को बाजार में सही कीमत नहीं मिल पाएगी.

6-8 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ राज्यों में 6 से 8 प्रतिशत तक फसल नुकसान हो सकता है. हालांकि यह नुकसान हर जगह समान नहीं होगा, बल्कि उन इलाकों में ज्यादा असर दिखेगा जहां बारिश से पहले सिंचाई की गई थी और तेज हवाएं चलीं. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि कुल उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन किसानों के स्तर पर नुकसान जरूर महसूस किया जाएगा.

रिकॉर्ड रकबे में हुई बुवाई, उत्पादन उम्मीद बरकरार

इस साल देश में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर हुई है. 2025-26 सीजन में करीब 33.46 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है, जो पिछले साल के 32.80 मिलियन हेक्टेयर से ज्यादा है. सरकार को उम्मीद है कि इस बार करीब 120.21 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है, जो अब तक का रिकॉर्ड होगा. हालांकि मौसम की मार से इस अनुमान पर थोड़ा असर पड़ सकता है.

कटाई का समय और बढ़ी चिंता

इस समय देश में गेहूं की कटाई अभी शुरुआती दौर में है. कुल मिलाकर अभी सिर्फ 4 प्रतिशत फसल ही कटी है. गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कटाई काफी हद तक पूरी हो चुकी है, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों में अप्रैल से कटाई शुरू होगी. ऐसे में अगर मौसम इसी तरह खराब बना रहा, तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है.

कीमतों पर भी पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो बाजार में अच्छे गेहूं की मांग बढ़ सकती है. इससे कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है. पिछले साल भी कीमतों में तेजी आई थी और कई कंपनियों ने एमएसपी से ज्यादा दाम पर गेहूं खरीदा था. हालांकि इस बार व्यापारी और मिलर्स ज्यादा सावधानी से खरीदारी कर सकते हैं.

सरकार की तैयारी और खरीद लक्ष्य

सरकार ने 2026-27 के लिए करीब 30.3 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है. यह खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि अच्छी पैदावार से देश में खाद्य सुरक्षा मजबूत बनी रहेगी, लेकिन मौसम की मार से यह लक्ष्य थोड़ा प्रभावित हो सकता है.

मौजूदा हालात यह बताते हैं कि मौसम की अनिश्चितता खेती के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. बेमौसम बारिश और तेज हवाएं किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं. अगर आने वाले दिनों में मौसम साफ रहता है और धूप निकलती है, तो नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है. लेकिन अगर बारिश जारी रही, तो गेहूं की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर पड़ना तय है.

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