योगी सरकार की योजना से बदली गांव की तस्वीर, 28.16 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

Lakhpati Didi Scheme: उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश तेज हुई है. प्रदेश में 10.50 लाख से ज्यादा SHG से करीब 1.25 करोड़ ग्रामीण परिवार जुड़े हैं. इनमें 28.16 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं.

नोएडा | Published: 3 Sep, 2026 | 11:55 AM

Lakhpati Didi UP: उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं की भूमिका तेजी से बदल रही है. अब महिलाएं सिर्फ घर और खेती संभालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार की कमाई बढ़ाने और आर्थिक फैसलों में भी हिस्सा ले रही हैं. स्वयं सहायता समूहों यानी SHG से जुड़कर महिलाएं बचत करने के साथ बैंकिंग, लोन और छोटे कारोबार की तरफ आगे बढ़ रही हैं. योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में 10.50 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं. इनसे करीब 1.25 करोड़ ग्रामीण परिवार जुड़े हैं. खास बात यह है कि इनमें 28.16 लाख से ज्यादा महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. खेती, पशुपालन, दूध का कारोबार, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों जैसे कामों से महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं.

छोटी बचत से शुरू हो रही बड़ी कमाई

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की शुरुआत छोटे स्तर से होती है. स्वयं सहायता समूहों में शामिल महिलाएं नियमित तौर पर थोड़ी-थोड़ी रकम बचाती हैं. यही छोटी बचत आगे चलकर समूह की साझा पूंजी बनती है. इसके बाद महिलाओं को बैंकिंग व्यवस्था और संस्थागत लोन से जोड़ा जाता है. इससे उन महिलाओं के लिए भी कारोबार शुरू करना आसान होता है, जिनके पास पहले पर्याप्त पूंजी नहीं थी. समूह के जरिए उन्हें अकेले की तुलना में आर्थिक फैसले लेने और आगे बढ़ने का बेहतर आधार मिलता है.

खेती के साथ कई दूसरे कामों से जुड़ रहीं महिलाएं

ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रखा जा रहा है. वे पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय सामान तैयार करने और अलग-अलग सेवा गतिविधियों से भी जुड़ रही हैं. इससे परिवार के पास कमाई के एक से ज्यादा साधन तैयार हो रहे हैं. नियमित आमदनी आने से महिलाएं परिवार की आर्थिक जरूरतों में ज्यादा योगदान दे पा रही हैं. साथ ही, कई मामलों में वे घर के बड़े आर्थिक फैसलों में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं.

28.16 लाख ‘लखपति दीदी’ बनीं बदलाव की पहचान

उत्तर प्रदेश में 28.16 लाख से ज्यादा महिलाओं का ‘लखपति दीदी’ बनना ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को दिखाता है. यहां ‘लखपति दीदी’ का मतलब ऐसी महिला से है जिसकी सालाना आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंच गई है. आमदनी बढ़ने का फायदा सिर्फ महिला तक नहीं रहता. परिवार बच्चों की पढ़ाई, भोजन, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरी चीजों पर ज्यादा खर्च करने की स्थिति में आता है. वहीं, गांव में जब महिलाओं का कारोबार बढ़ता है तो सामान की खरीद-बिक्री और दूसरी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है.

10.50 लाख SHG से जुड़े 1.25 करोड़ परिवार

प्रदेश में 10.50 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क तैयार हो चुका है. इनके जरिए करीब 1.25 करोड़ ग्रामीण परिवार जुड़े हैं. इस व्यवस्था से महिलाओं को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का मौका मिल रहा है. इस मॉडल में महिलाओं को एक साथ लोन देकर छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे आगे बढ़ाने पर जोर है. पहले समूह से जुड़ाव, फिर बचत, बैंकिंग, प्रशिक्षण, ऋण और उसके बाद उत्पादन व बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है.

गांवों में मजबूत हुआ महिला समूहों का नेटवर्क

महिलाओं के इन समूहों को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघ बनाए गए हैं. ग्राम संगठन स्थानीय स्तर पर SHG के काम को जोड़ने और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं. वहीं, संकुल स्तरीय संघ बड़े स्तर पर प्रशिक्षण, बाजार और संस्थागत सहयोग से जुड़ने का रास्ता तैयार करते हैं.

अब सिर्फ बचत नहीं, कारोबार पर जोर

ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं की भूमिका अब बचत और छोटे लोन तक सीमित नहीं रह गई है. महिलाएं उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, बिक्री और बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही हैं. इससे गांवों में महिलाओं की कमाई बढ़ने के साथ एक स्थानीय आर्थिक तंत्र भी मजबूत हो रहा है. छोटे कारोबार बढ़ने पर दूसरे लोगों के लिए भी काम और रोजगार के अवसर बन सकते हैं. स्वयं सहायता समूहों के जरिए उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश हो रही है.

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