हिमाचल प्रदेश सरकार ने असली पनीर के नाम पर बेचे जा रहे नॉन-डेयरी ‘एनालॉग पनीर’ के निर्माण, भंडारण, सप्लाई और बिक्री पर रोक लगा दी है. सरकार का यह आदेश पूरे राज्य में तुरंत लागू हो गया है और एक साल तक प्रभावी रहेगा. खाद्य सुरक्षा आयुक्त आशीष सिंघमार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत यह आदेश जारी किया है.
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने यह कदम बाजार में की गई जांच और लैब टेस्ट के बाद उठाया है. खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पनीर में मिलावट, गलत लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए थे. अधिकारियों ने यह भी पाया कि कुछ उत्पादों की सप्लाई और ट्रेसिंग से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था.
नकली पनीर पर हिमाचल सरकार सख्त
हिमाचल प्रदेश सरकार ने असली पनीर के नाम पर बेचे जा रहे नॉन-डेयरी उत्पादों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं. जांच में सामने आया कि कुछ सप्लायर पनीर जैसे उत्पादों में दूध की चर्बी की जगह वनस्पति तेल और दूसरे नॉन-डेयरी फैट का इस्तेमाल कर रहे थे और इन्हें ‘पनीर’ के नाम से बेचा जा रहा था. कई मामलों में इन उत्पादों पर सही लेबल, खरीद बिल और सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड भी नहीं मिले. अब ऐसे उत्पादों को ‘पनीर’ के नाम से बनाने, रखने, ले जाने या बेचने पर रोक लगा दी गई है.
मेन्यू में पनीर लिखा तो असली डेयरी पनीर ही देना होगा
यह नियम रेस्टोरेंट, होटल, क्लाउड किचन, हॉस्टल, ढाबे और कैटरिंग कारोबार पर भी लागू होगा. अगर किसी मेन्यू में पनीर की डिश लिखी है तो उसमें सिंथेटिक या एनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. किसी नॉन-डेयरी विकल्प का इस्तेमाल होने पर इसकी जानकारी ग्राहकों को साफ तौर पर देनी होगी. सरकार ने कारोबारियों को खरीद बिल, बैच की जानकारी और सही लेबलिंग रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी उत्पाद के स्रोत का आसानी से पता लगाया जा सके.
नॉन-डेयरी उत्पादों पर पूरी रोक नहीं
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच करने, सैंपल लेने और नियम तोड़ने वाले उत्पादों को जब्त, वापस मंगाने या नष्ट करने की कार्रवाई का अधिकार दिया गया है. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि मानकों के मुताबिक बनाए गए और अलग से रेगुलेटेड नॉन-डेयरी उत्पादों पर रोक नहीं है. लेकिन उन्हें सही लेबल के साथ बेचना होगा और ग्राहकों को असली डेयरी पनीर के रूप में पेश नहीं किया जा सकेगा.