केले की कीमतों में गिरावट, 100 रुपये गुच्छा हुआ रेट.. किसानों को भारी नुकसान

तिरुचिरापल्ली में नेन्द्रन केले की कीमत गिरकर 10-12 रुपये प्रति किलो हो गई है, जबकि पिछले साल 40-50 रुपये थी. केरल के व्यापारी तिरुची की बजाय थेनी और मेट्टूपालयम से खरीद कर रहे हैं. किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं और सरकार से आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 20 Mar, 2026 | 08:48 PM

Mandi Rate: तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले में केला सस्ता हो गया है. कीमत में गिरावट आने के चलते किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. जहां पिछले साल एक गुच्छा केला 400- 450 रुपये में बिकता था, अब वही सिर्फ 100 रुपये में बिक रहा है. किसानों का कहना है कि केला की खेती में इस साल अच्छा भाव नहीं मिल रहा है. ऐसे में घाटा हो रहा है. इसलिए सरकार को आर्थिक मदद करनी चाहिए.

अब घटकर 10-12 रुपये प्रति किलो रह गया केला

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, थिरुवेरुम्बुर, मुसिरी, थोट्टियम और लालगुड़ी के किसान बड़ी मात्रा में नेन्द्रन केला  उगाते हैं, जिसे आमतौर पर केरल भेजा जाता है. लेकिन अब केरल के व्यापारी तिरुची की बजाय थेनी और मेट्टूपालयम से खरीद कर रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजार में ज्यादा आपूर्ति हो गई है और कीमतें गिर गई हैं.किसानों के मुताबिक, पिछले साल जहां इसका भाव 40- 50 रुपये प्रति किलो था, वहीं अब घटकर 10-12 रुपये प्रति किलो रह गया है. मुल्लिकारुम्बुर के किसान एसपी चंद्रन के अनुसार, व्यापारी बहुत कम दाम दे रहे हैं, जिससे किसानों को मजबूरी में करीब 11 रुपये प्रति किलो पर केला बेचना पड़ रहा है. इस साल करीब 8,000 एकड़ में नेन्द्रन केला लगाया गया, जो पिछले साल 6,000 एकड़ था.

केला किसानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है

किसान ने कहा कि जे. जयललिता के समय थिरुचेंदुरई में एक इंटीग्रेटेड केला मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाया गया था, जहां किसान अपनी फसल को एक हफ्ते से ज्यादा समय तक सुरक्षित रख सकते थे. किसानों का कहना है कि वे अब केले को ताजा रहते ही बेचना चाहते हैं, ताकि उन्हें बेहतर कीमत मिल सके. तमिल मनीला कांग्रेस के किसान विंग के कोषाध्यक्ष वायलूर एन. राजेंद्रन ने कहा कि पहले नेन्द्रन केले की खेती मुख्य रूप से तिरुची और तूतीकोरिन में ही होती थी. लेकिन नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर बनाना के प्रयासों से अब इसकी खेती थेनी, मेट्टूपालयम और भवानी के पहाड़ी इलाकों तक फैल गई है, जहां ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल हो रहा है. इससे तिरुची के किसानों का बाजार छोटा हो गया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से केला किसानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है.

चिप्स की कीमतों में नहीं आई कोई कमी

किसानों का कहना है कि सरकार को केले से जुड़े वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बनाने के लिए यूनिट्स शुरू करनी चाहिए, ताकि ऐसे हालात में उन्हें बेहतर दाम मिल सके. पुशकार्ट विक्रेता पी. करुणाकरण ने कहा कि आमतौर पर किसान नेन्द्रन केला खुदरा बाजार में नहीं बेचते, लेकिन इस साल कई छोटे किसान गांधी मार्केट में सीधे बेचने आ रहे हैं, इसलिए वे भी वहीं से खरीद कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि केले के दाम भले ही गिर गए हों, लेकिन तिरुची में केले के चिप्स की कीमतों  में कोई कमी नहीं आई है. सड़क किनारे दुकानों पर ये अभी भी 100 रुपये प्रति 250 ग्राम और अन्य दुकानों पर 110-  125 रुपये में बिक रहे हैं.

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Published: 20 Mar, 2026 | 08:48 PM
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