Kerala News: केरल में इस साल ओणम की शुरुआत बारिश की वजह से थोड़ी मुश्किल रही. कई इलाकों में सब्जियों और फूलों की फसल को नुकसान पहुंचा है. हालांकि, अब मौसम साफ होने के बाद राज्य के बड़े बाजारों में स्थानीय स्तर पर उगाई गई सब्जियों और फूलों की बिक्री बढ़ने लगी है. सबसे अच्छी बात यह है कि फूलों की खेती का रकबा भी बढ़ा है. कृषि विभाग और कुडुम्बश्री के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में फूलों की खेती का क्षेत्रफल 2025 में 724.13 हेक्टेयर से बढ़कर इस साल 1,217 हेक्टेयर हो गया है. इसमें 422 हेक्टेयर क्षेत्र कृषि विभाग के तहत और 795 हेक्टेयर कुडुम्बश्री के तहत आता है.
हालांकि, स्थानीय उत्पादन अभी भी ओणम की भारी मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसके बावजूद, यह केरल के लिए राहत की खबर है, क्योंकि राज्य को हर साल पड़ोसी राज्यों से बड़ी मात्रा में फूल मंगाने पड़ते हैं. केरल में इस बार ओणम के लिए कुडुम्बश्री से जुड़े 5,688 किसान समूहों ने फूलों की खेती की है. इन समूहों ने करीब 1,966.93 एकड़ यानी 795.9 हेक्टेयर में फूल उगाए हैं. कुडुम्बश्री का लक्ष्य इस साल फूल और सब्जियों की बिक्री से पिछले साल से ज्यादा कमाई करना है.
सब्जियों की खेती 20 हजार एकड़ पार
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ओणम में कुडुम्बश्री के किसानों ने फूल और सब्जियां बेचकर 10.3 करोड़ रुपये कमाए थे. इस साल इससे ज्यादा कमाई का लक्ष्य रखा गया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना को ज्यादा इलाकों तक पहुंचाना भी बड़ी उपलब्धि है. पिछले साल सब्जियों की खेती 8,913 एकड़ में हुई थी, जबकि फूल 1,820 एकड़ में उगाए गए थे. इस साल शुरुआत में सब्जियों के लिए 12,000 और फूलों के लिए 2,000 एकड़ का लक्ष्य रखा गया था. ज्यादा किसान समूह जुड़ने के बाद सब्जियों की खेती बढ़ाकर 20,475.81 एकड़ कर दी गई, जबकि फूलों की खेती 1,966.93 एकड़ तक पहुंच गई.
खराब मौसम से फूलों की फसल को नुकसान
केरल में खराब मौसम का असर फूलों और सब्जियों की फसलों पर पड़ा है. कृषि विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, कई इलाकों में मौसम खराब रहने से इस बार उम्मीद के मुताबिक फसल नहीं मिल पाएगी. फूलों में देरी से आने वाली बहार भी किसानों के लिए परेशानी बन सकती है, क्योंकि ओणम के बाद तैयार होने वाले फूलों को बेचने के लिए उन्हें नए बाजार तलाशने पड़ेंगे.
महिला किसानों को रोजगार का सहारा
पालक्काड के अट्टाप्पाडी में फूलों की खेती का एक नया मॉडल देखने को मिल रहा है. कुडुम्बश्री के ‘निरापोलिमा’ अभियान के बाद अट्टाप्पाडी के 10 गांवों में फूलों की खेती शुरू हुई है. इससे ओणम से पहले इन इलाकों में फूलों की खेती को बढ़ावा मिला है. इस पहल का मकसद स्थानीय स्तर पर फूलों का उत्पादन बढ़ाना और महिला किसानों को रोजगार और आय का स्थायी साधन देना है. साथ ही, त्योहार के दौरान बाजार में ताजे फूलों की उपलब्धता बढ़ाना भी इसका लक्ष्य है. अट्टाप्पाडी में बाजार की मांग के हिसाब से अलग-अलग रंगों और किस्मों के फूल उगाए जा रहे हैं. इनमें पीले, नारंगी और सफेद गेंदा, साथ ही सफेद, पीले और बैंगनी गुलदाउदी (जामंती) शामिल हैं.