Navratri Special: दूध बेचकर लखपति बन गईं महिला, दो साल में कमा लिए 34 लाख.. ऐसे मिली सफलता

Success Story: उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब सिर्फ घर की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं. नवरात्रि स्पेशल में हम पेश कर रहे हैं बलिया की दुर्गेश तिवारी की कहानी, जिन्होंने नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत दुग्ध व्यवसाय से मात्र दो वर्षों में 34.61 लाख रुपये कमाए और ‘काशी की लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 19 Mar, 2026 | 12:11 PM

Women Success Story: नवरात्रि सिर्फ पूजा और उत्सव का समय नहीं, बल्कि महिलाओं में शक्ति और आत्मनिर्भरता जगाने का प्रतीक भी है. यही संदेश साकार हो रहा है उत्तर प्रदेश के गांवों में, जहां महिलाएं अब घर की सीमाओं से बाहर निकलकर आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन रही हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गांव की तस्वीर बदल रही है और महिलाएं गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही हैं. बलिया जनपद के बहुआरा गांव की दुर्गेश तिवारी इस नवदुर्गा नवशक्ति की जीवंत मिसाल हैं. मात्र दो वर्षों में दुग्ध व्यवसाय से उन्होंने 34.61 लाख रुपये कमाकर ‘काशी की लखपति दीदी’ बनने का गौरव हासिल किया.

यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए हो रहे सामाजिक-आर्थिक बदलाव का प्रतीक भी है.

संघर्ष की जमीन से सफलता की उड़ान

दुर्गेश तिवारी एक साधारण परिवार से हैं. शादी के बाद उनका जीवन पति, दो बेटियों और सास के साथ सीमित था. परिवार की आय मुख्य रूप से खेती और कुछ पशुओं पर निर्भर थी. दूध बेचने पर उचित मूल्य नहीं मिलता था और भुगतान की अनिश्चितता उनके सपनों पर रोक बन गई थी. दुर्गेश बताती हैं, ‘घर का खर्च और बेटियों की पढ़ाई की चिंता में नींद ही उड़ गई थी.’

काशी डेयरी से बदली किस्मत

इसी दौरान उन्हें काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, वाराणसी की जानकारी मिली. यहां गुणवत्ता आधारित उचित मूल्य और 365 दिन सीधे बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था थी. दुर्गेश ने सदस्यता लेकर दूध आपूर्ति शुरू की और अपने पशुपालन का दायरा बढ़ाकर 20 से अधिक पशु तक कर लिया. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और व्यवसाय मुनाफेदार बन गया.

नवदुर्गा की प्रेरणा: ‘लखपति दीदी’ बनने का सफर

लगातार मेहनत और सही प्लेटफॉर्म मिलने से दुर्गेश ने दो वर्षों में 34.61 लाख रुपये की आय अर्जित की. यह सिर्फ आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक भी है. दुर्गेश ने अपनी बड़ी बेटी की शादी सम्मानपूर्वक की और छोटी बेटी को पुलिस अधिकारी बनाने का सपना संजो रखा है. आज दुर्गेश तिवारी पंचदेवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं. उनके नेतृत्व में गांव की अन्य महिलाएं भी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. दुर्गेश का अगला लक्ष्य आधुनिक डेयरी फार्म स्थापित करना और गोबर से जैविक खाद बनाकर अतिरिक्त आय के स्रोत तैयार करना है.

योगी सरकार के विजन से बदलता ग्रामीण परिदृश्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. स्वयं सहायता समूह और डेयरी व्यवसाय के माध्यम से महिलाएं अब गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख शक्ति बन रही हैं.

नवरात्रि के इस पावन अवसर पर दुर्गेश तिवारी की कहानी हमें यह सिखाती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो पूरे गांव, समाज और अर्थव्यवस्था मजबूत बनते हैं. नवदुर्गा-नवशक्ति की यह ऊर्जा अब केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रतीक बन गई है.

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Published: 19 Mar, 2026 | 11:07 AM
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