मिलों को सरकार की दो टूक, त्योहारों से पहले चीनी की सप्लाई बढ़ाएं.. अब हर महीने होगी निगरानी
सरकार ने चीनी मिलों से त्योहारों के दौरान पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने को कहा है. अक्टूबर से चीनी उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों की हर महीने निगरानी होगी. सरकार के मुताबिक, उत्पादन अनुमान घटने के बावजूद पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. वहीं, चीनी के बढ़ते भाव के लिए जमाखोरी को जिम्मेदार बताया गया है. सरकार ने कीमतें स्थिर रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है.
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से त्योहारों के सीजन में बाजार में पर्याप्त चीनी की सप्लाई बनाए रखने को कहा है. साथ ही, अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में सरकार हर महीने चीनी उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों की निगरानी करेगी, ताकि कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सही समय पर फैसले लिए जा सकें. खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि मिलों को चीनी उचित कीमतों पर बेचनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार चीनी के भाव स्थिर रखने के लिए जरूरत के मुताबिक कदम उठाएगी. मिलों से हर महीने उत्पादन और बिक्री का सही आंकड़ा देने को भी कहा गया है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि पिछले कुछ दिनों में मिल स्तर पर चीनी के भाव में नरमी आई है, लेकिन खुदरा कीमतें अभी भी ऊंची हैं. गुरुवार को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 60.20 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि बुधवार को यह 60.31 रुपये था. मिल स्तर पर चीनी का भाव 4,700 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा.
चीनी उद्योग से 5 करोड़ किसानों को रोजगार
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है. देश का चीनी उद्योग कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है. गन्ना क्षेत्र से करीब 5 करोड़ किसान जुड़े हैं. वहीं, चीनी मिलों और इससे जुड़े उद्योगों में करीब 5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है. सरकार के मुताबिक, अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच देश में चीनी के खुदरा भाव में सालाना आधार पर करीब 3 फीसदी की ही बढ़ोतरी हुई है. यानी इस दौरान चीनी की खुदरा कीमतें मोटे तौर पर स्थिर रही हैं.
चीनी उत्पादन का अनुमान घटा
वर्तमान सीजन अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है. यह शुरुआती अनुमान 343 लाख टन से कम है. गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर रोग फैलने से उत्पादन अनुमान घटाया गया है. सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति भी दी है. इसके बावजूद सरकार का कहना है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक उपलब्ध है.
चीनी आयात के 8 लाख टन परमिट मंजूर
खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि TRQ योजना के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की घोषणा की गई थी. इसमें से करीब 8 लाख टन के आयात परमिट को मंजूरी दी जा चुकी है. उन्होंने बताया कि कुछ रिफाइनर ने ALS योजना के तहत शून्य शुल्क पर आयात की गई कच्ची चीनी में से 2.65 लाख टन घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति मांगी है. सरकार ने 31 अगस्त को दो रिफाइनरों को सितंबर के पहले पखवाड़े में 50-50 हजार टन चीनी घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी थी. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, दूसरे पखवाड़े के लिए भी इतनी ही मात्रा को मंजूरी मिल सकती है.
चीनी की तेजी के लिए होर्डिंग जिम्मेदार
श्रीवास्तव ने चीनी के मौजूदा भाव बढ़ने के लिए जमाखोरी यानी होर्डिंग को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि कीमतों में तेजी मांग बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि त्योहारों के दौरान भाव और बढ़ने की उम्मीद में चीनी जमा करने से आई है. उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग से जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि कीमतें स्थिर रहें. त्योहारों के दौरान चीनी के भाव बढ़ने का कोई कारण नहीं है.