चीनी के बढ़ते दामों के बीच किसानों की नई मांग, गुड़ इकाइयों को इथेनॉल उत्पादन की मंजूरी देने की अपील

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच कर्नाटक के गन्ना किसानों ने गुड़ बनाने वाली इकाइयों को इथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने की मांग की है. किसान नेता कुरुबुर शांतकुमार का कहना है कि इससे किसानों की चीनी मिलों पर निर्भरता कम होगी और उनकी आय बढ़ सकती है. उन्होंने स्थानीय गुड़ इकाइयों को तकनीक और जरूरी अनुमति देने की मांग की है.

नोएडा | Updated On: 30 Aug, 2026 | 12:06 PM

Agriculture News: चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच कर्नाटक के गन्ना किसानों ने सरकार से गुड़ बनाने वाली इकाइयों को इथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने की मांग की है. किसानों का कहना है कि इससे उन्हें गन्ने से अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा. किसानों का कहना है कि गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में होने से चीनी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है. वहीं, खाद्य उद्योग ने भी सरकार से चीनी के बढ़ते दाम पर तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है.

कर्नाटक के गन्ना किसान लंबे समय से अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं. अब उन्हें इथेनॉल उत्पादन में एक नई उम्मीद नजर आ रही है. राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबुर शांतकुमार ने द हिन्दू से कहा कि इथेनॉल उत्पादन का फायदा सिर्फ बड़ी चीनी मिलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्थानीय गुड़ इकाइयों को इथेनॉल बनाने की तकनीक और इसकी अनुमति दी जानी चाहिए. इससे किसानों और छोटी गुड़ इकाइयों को भी इथेनॉल उत्पादन से फायदा मिल सकेगा.

65 रुपये लीटर इथेनॉल खरीदती हैं सरकारी कंपनियां

उन्होंने कहा कि गुड़ इकाइयों से तैयार इथेनॉल का इस्तेमाल घरों में पर्यावरण के अनुकूल ईंधन  के रूप में करने की अनुमति दी जानी चाहिए. इसके अलावा किसान इसे अपने वाहन और ट्रैक्टर चलाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकें. शांतकुमार ने कहा कि सरकारी कंपनियां इथेनॉल करीब 65 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर खरीदती हैं. ऐसे में अगर किसानों को अपनी अतिरिक्त उपज से इथेनॉल बनाने और बेचने की अनुमति मिलती है, तो उनकी आय में काफी बढ़ोतरी हो सकती है.

इथेनॉल की अनुमति से चीनी मिलों पर निर्भरता घटेगी

उन्होंने कहा कि अगर गुड़ बनाने वाली इकाइयों को इथेनॉल उत्पादन की अनुमति  मिलती है, तो गन्ना किसानों की निर्भरता चीनी मिलों पर कम हो जाएगी. उनके मुताबिक, चीनी मिलें किसानों को गन्ने का उचित भुगतान नहीं कर रही हैं. सरकार की ओर से कीमत तय कर मिलों को किसानों को भुगतान का निर्देश देने के बाद भी कई बार मिल प्रबंधन अदालत का रुख कर स्टे ले लेते हैं. कर्नाटक में हर साल करीब 600 लाख मीट्रिक टन गन्ने का उत्पादन होता है. इसमें से सिर्फ 30-40 लाख मीट्रिक टन गन्ना स्थानीय गुड़ इकाइयों को मिलता है, जबकि बाकी गन्ना चीनी मिलों में जाता है. शांतकुमार ने कहा कि अगर गुड़ इकाइयों को इथनॉल बनाने की अनुमति मिलती है, तो राज्य में इनकी संख्या मौजूदा करीब 15,000 से बढ़कर आसानी से 50,000 तक पहुंच सकती है.

Published: 30 Aug, 2026 | 12:04 PM

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