Poultry Industry: मक्का की बढ़ती मांग से टेंशन में पोल्ट्री उद्योग, महंगा हो सकता है पशु आहार
तमिलनाडु के नमक्कल में इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की बढ़ती मांग से पोल्ट्री उद्योग की चिंता बढ़ गई है. मक्के का भाव 22 से बढ़कर 30 रुपये किलो हो गया है. पोल्ट्री फीड में 30 फीसदी से ज्यादा मक्का इस्तेमाल होता है. बढ़ती कीमतों से एक अंडे की फीड लागत 2.25 से बढ़कर 3.50 रुपये हो गई है.
तमिलनाडु के नमक्कल में मक्का की बढ़ती मांग ने पोल्ट्री उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. केंद्र की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत इथेनॉल बनाने में मक्के का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. इससे मक्के की मांग बढ़ रही है और इसके भाव भी ऊपर जा रहे हैं. मक्का पोल्ट्री फीड का एक प्रमुख घटक है. ऐसे में पोल्ट्री कारोबारियों को डर है कि अगर मक्के की ज्यादा मात्रा इथेनॉल उत्पादन में जाने लगी, तो पोल्ट्री फीड की लागत और बढ़ सकती है. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, फीड महंगा होने से मुर्गियों की लागत बढ़ेगी. इसका असर अंडा उत्पादन की लागत पर भी पड़ सकता है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इथेनॉल बनाने में मक्के की बढ़ती मांग का असर पोल्ट्री सेक्टर पर भी दिख रहा है. पिछले एक साल में मक्के का भाव करीब 22 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. यानी कीमत में करीब 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस साल मक्के की ज्यादा मात्रा इथेनॉल उत्पादन में जा रही है. इससे पोल्ट्री फीड के लिए मक्का लेने की प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है.
पोल्ट्री फीड में 30 फीसदी से ज्यादा मक्का अहम
लाइवस्टॉक एंड एग्री फार्मर्स ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष पीवी सेंथिल ने कहा कि इथेनॉल के लिए मक्के की बढ़ती मांग का पोल्ट्री किसानों पर बड़ा असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि पोल्ट्री फीड में मक्के का आसानी से कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है. पोल्ट्री फीड में 30 फीसदी से ज्यादा हिस्सा मक्के का होता है. यह फीड का जरूरी और आसानी से बदला नहीं जा सकने वाला घटक है. मक्का अंडे की जर्दी का रंग बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. दूसरे फीड का इस्तेमाल करने पर जर्दी का रंग हल्का पड़ सकता है.
मक्के के दाम बढ़ने से अंडा उत्पादन लागत 56 फीसदी बढ़ी
पोल्ट्री के लिए इस्तेमाल होने वाले मक्के को अच्छी तरह सुखाकर रखना जरूरी है. इसमें नमी 14 फीसदी से कम होनी चाहिए. ज्यादा नमी रहने पर फंगस और जहरीले टॉक्सिन बन सकते हैं. इससे मुर्गियों की सेहत प्रभावित होने के साथ अंडा उत्पादन भी घट सकता है. अगर कम गुणवत्ता वाला मक्का भी इथेनॉल कंपनियां खरीदने लगती हैं, तो इस बाजार में मक्के की ज्यादा मात्रा जा सकती है. इससे खाद्य और ईंधन दोनों क्षेत्रों के बीच मक्के को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है.
अंडा उत्पादन की लागत बढ़ी, छोटे पोल्ट्री किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
लाइवस्टॉक एंड एग्री फार्मर्स ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष पीवी सेंथिल ने बताया कि मक्के के दाम बढ़ने से एक अंडे के उत्पादन में फीड की लागत करीब 2.25 रुपये से बढ़कर 3.50 रुपये हो गई है. यानी इसमें करीब 56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम पोल्ट्री किसानों पर पड़ रहा है. वहीं, आर्थिक रूप से मजबूत कारोबारी बड़ी मात्रा में मक्का खरीदकर स्टॉक कर पा रहे हैं. सेंथिल ने कहा कि इसका समाधान मक्के का उत्पादन बढ़ाना है. सरकार को मक्का उत्पादन का लक्ष्य तय करना चाहिए और कृषि विभाग के साथ मिलकर इसकी खेती बढ़ाने पर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईंधन सस्ता करने की कोशिश में खाद्य पदार्थ महंगे नहीं होने चाहिए.