गन्ना पेराई करने और चीनी के साथ ही इथेनॉल बनाने वाली दिग्गज कंपनी बलरामपुर चीनी मिल्स ने अप्रैल-जून तिमाही में कुल रेवेन्यू 1636 करोड़ रुपये हासिल किया है, जो बीते साल की समान अवधि की तुलना में 6 फीसदी अधिक है. कंपनी ने कहा है कि आगामी तिमाहियों के दौरान रेवेन्यू और प्रॉफिट और बढ़ने की संभावना है. बलरामपुर चीनी मिल्स उत्तर प्रदेश की बड़ी चीनी मिलों में शामिल है, जो लाखों किसानों से गन्ना खरीद करती है और पेराई करके उत्पाद बनाती है.
अप्रैल-जून के दौरान रेवेन्यू बढ़कर 1636 करोड़ पहुंचा
बलरामपुर चीनी मिल्स ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं. कंपनी ने स्टॉक रेगुलेटर फाइलिंग में बताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कुल रेवेन्यू 6.12 फीसदी बढ़कर 1,636.79 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 1,542.27 करोड़ रुपये था.
तिमाही के दौरान 44 करोड़ का मुनाफा
रेगुलेटर फाइलिंग में कंपनी ने कहा कि पहली तिमाही का मुनाफा 44.14 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है. पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 51.57 करोड़ रुपये था. यानी 14.40 फीसदी मुनाफा घट गया है. बता दें एक तिमाही में 90 या 92 दिन गिने जाते हैं और उस दौरान रेवेन्यू, प्रॉफिट, कॉस्ट समेत अन्य बिंदुओं पर कंपनियां रेगुलेटर को जानकारी देती हैं.
कंपनी ने बताया क्यों घटा मुनाफा
बलरामपुर चीनी मिल्स ने कहा है कि ज्यादा खर्चों के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही का शुद्ध मुनाफा गिरा है. इस अवधि में कंपनी का खर्च 1,485.39 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर 1,599.65 करोड़ रुपये रहा है. कंपनी ने आधिकारिक बयान में कहा है कि आगामी तिमाहियों में रेवेन्यू और प्रॉफिट में उछाल की उम्मीद है और इस दिशा में काम किया जा रहा है.
कंपनी का रोजाना 80 हजार टन गन्ना पेराई
बलरामपुर चीनी मिल्स उत्तर प्रदेश में 10 प्लांट चलाती है, जो मुख्य रूप से पूर्वी और मध्य इलाके में हैं. इनकी कुल गन्ना पेराई क्षमता 80,000 टन प्रति दिन है. कंपनी मुख्य रूप से चीनी का उत्पादन करती है. इसके अलावा यह कंपनी एथेनॉल, अल्कोहल, बिजली, खाद और गन्ने के अवशेषों (मोलासेज व बैगास) जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद भी बनाती है. कंपनी बायो कंपोस्ट, पोटाश खाद के साथ ही पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाने की तैयारी कर रही है.