अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने कम बारिश की आशंका वाले 15 राज्यों के 342 जिलों के लिए कंटिंजेंसी प्लान तैयार किया है. कृषि और पानी से जुड़े जोखिमों पर नजर रखने के लिए कई मॉनिटरिंग सेल भी सक्रिय किए गए हैं. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कहा है कि मौसम की मार से फसलों को बचाने के लिए किसानों को 192 लाख क्विंटल से ज्यादा जलवायु-अनुकूल बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि सरकार IMD के साथ मिलकर मॉनसून और अल नीनो के कृषि पर संभावित असर की लगातार निगरानी कर रही है.
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में कहा कि सरकार ने अल नीनो के संभावित असर के लिहाज से 15 राज्यों के 342 संवेदनशील जिलों की पहचान की है. किसानों को जोखिम से बचाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि केंद्रीय जल आयोग और संबंधित राज्य सरकारों को जलाशयों के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने और सिंचाई की कुशल तकनीकों को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है. सरकार की कंटिजेंसी प्लानिंग के तहत क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप (CWWG) की हर सप्ताह बैठक हो रही है. इसमें बारिश, जलाशयों में पानी, भूजल स्तर, फसल बुवाई, कृषि इनपुट, बाजार की स्थिति और कीट-रोगों की निगरानी की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर कदम उठाए जा सकें.
खरीफ के लिए मांग से ज्यादा बीज उपलब्ध
केंद्र सरकार ने कहा कि अल नीनो के संभावित असर से कम बारिश की स्थिति को देखते हुए तैयारियों की समीक्षा की गई है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने भी कम बारिश वाले हालात से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया है. कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने संसद में कहा कि खरीफ फसलों के लिए राज्यों की 172.80 लाख क्विंटल बीज की मांग के मुकाबले 192.25 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध हैं. राज्यों ने 1.74 लाख क्विंटल बीज नेशनल सीड रिजर्व के तौर पर सुरक्षित रखा है.
कम बारिश में फसल बचाने पर जोर
सरकार ने फसल विविधीकरण, कम अवधि में तैयार होने वाली और सूखा सहन करने वाली फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है. इसके अलावा संतुलित खाद इस्तेमाल, पानी बचाने, माइक्रो इरिगेशन, मल्चिंग और इंटरक्रॉपिंग जैसी जलवायु-अनुकूल तकनीकों को अपनाने की सलाह दी जा रही है. कृषि मंत्रालय ने कहा कि बारिश में देरी और अल नीनो के संभावित असर से तुअर, सोयाबीन और कपास की बुवाई प्रभावित हो सकती है. ऐसे में किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है. मंत्रालय ने किसानों से मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों के साथ अन्य कम अवधि वाली फसलों को अपनाने की अपील की है. इससे कम बारिश की स्थिति में फसल नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकता है.