स्मार्ट फार्मिंग से खेती को बनाएं फायदेमंद, AI सेंसर से मिलेगी मिट्टी और मौसम की सटीक जानकारी

प्रेसिशन फार्मिंग में किसानों को बहुत ज्यादा खर्चा करने की जररूत नहीं होती है. बता दें कि, खेती के इस आधुनिक तरीके में किसानों को केवल जरूरत के अनुसार ही खेतों में खाद, पानी और दवा का इस्तेमाल करना होता है.

नोएडा | Published: 29 Aug, 2025 | 11:30 PM

खेती करते समय किसानों की यही कोशिश रहती है कि उनकी खेती लंबे समय तक उन्हें फायदा दे. यानी खेती टिकाऊ और फायदेमंद हो. अपनी खेती से लंबे समय तक फायदा लेने के लिए किसान प्रेसिशन फार्मिंग की मदद ले सकते हैं. प्रेसिशन फार्मिंग (Precision Farming) यानी सटीर फार्मिंग , खेती करने का आधुनिक तरीका है जिसमें वैज्ञानिक तरीकों और तकनीकी साधनों की मदद से खेती को मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है. इसकी मदद से किसानों को मौसम की सटीक जानकारी मिल जाती है जिसके चलते किसान समय रहते फसलों को सुरक्षित करने के इंतजाम कर लेते हैं.

GPS से होती है खेतों की मैपिंग

प्रेसिशन फार्मिंग में सेंसर और जीपीएस (GPS) तकनीका का इस्तेमाल कर किसान खेतों की सही स्थिति और मैपिंग जान सकते हैं. यानी किसानों को अपने खेत से जुड़ी सारी जनाकारी बिल्कुल सही और सटीक ढंग से मिलती है. इसमें खेत की सीमाओं, मिट्टी की गुणवत्ता, नमी, उपज क्षमता आदि का एक डिजिटल मैप तैयार किया जाता है, जिसके अनुसार किसान अपने खेतों में उर्वरक, पानी और कीटनाशकों का सही तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं.

सेंसर से मिलती है मौसम की सटीक जानकारी

मध्य प्रदेश कृषि विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रेसिशन फार्मिंग के तहत किसानों को अपने खेतों में एक सेंसर लगाना होता है, जिसे ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (AWS) कहा जाता है. ये सेंसर किसानों को खेत के तापमान, नमी, वर्षा, हवा की दिशा आदि की जानकारी देता है. इसके अलावा सैटेलाइट डेटा की मदद से मौसम में होने वाले बदलाव की भी जानकारी दी जाती है. किसानों को इन सेंसरों से मिलने वाली सटीक जानकारी के कारण वे समय रहते फसलों की सुरक्षा के इंतजाम कर सकते हैं.

कम लागत में उन्नत क्वालिटी का उत्पादन

प्रेसिशन फार्मिंग में किसानों को बहुत ज्यादा खर्चा करने की जररूत नहीं होती है. बता दें कि, खेती के इस आधुनिक तरीके में किसानों को केवल जरूरत के अनुसार ही खेतों में खाद, पानी और दवा का इस्तेमाल करना होता है. प्रेसिशन खेती की मदद से किसान अपने खेतों की बेहतर तरह से देखभाल और निगरानी कर पाते हैं जिसके कारण उनकी फसलों का उत्पादन भी उन्नत क्वालिटी का होता है. खेतों में लगे सेंसर की मदद से नियमित रूप से होने वाली निगरानी से कीटों और रोगों की भी समय रहते सटीक पहचान हो जाती है. इसके अलावा किसान अपनी खेतों की जरूरत के हिसाब से ही फसलों का उत्पादन करने में सक्षम होते हैं.

Published: 29 Aug, 2025 | 11:30 PM