चावल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता, गैर-बासमती की कीमतें 10 फीसदी से ज्यादा चढ़ीं, मांग-सप्लाई का बिगड़ा संतुलन

Rice Price Hike: देश में गैर-बासमती चावल की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों में 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ी हैं. मांग-सप्लाई में अंतर, धान के बढ़े MSP और मॉनसून की कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है. खरीफ फसल की नई आवक अक्टूबर के बाद होने से फिलहाल कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.

नोएडा | Updated On: 8 Aug, 2026 | 09:45 AM

Rice Prices India: देश में चावल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. खासकर गैर-बासमती चावल के दाम पिछले कुछ हफ्तों में 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए हैं. कारोबारियों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, बाजार में मांग के मुकाबले चावल की सप्लाई कम पड़ रही है. इसके अलावा मॉनसून की कमी और धान के बढ़े हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का असर भी चावल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

मांग बढ़ी, सप्लाई हुई कम

चावल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी प्रीमियम किस्मों में देखी जा रही है. सोना मसूरी, पोन्नी और मसूरी जैसी किस्मों की बाजार में मांग बनी हुई है, लेकिन इनकी उपलब्धता उतनी नहीं है. इसका असर टूटे चावल यानी ब्रोकन राइस की कीमतों पर भी पड़ा है. बिजनेस लाइन की र्पोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के कारोबारियों का कहना है कि इस समय चावल की कीमतों में तेजी के साथ मंडियों में धान की उपलब्धता भी थोड़ी कम महसूस हो रही है. हालांकि, अभी कीमतों में कुछ स्थिरता जरूर आई है, लेकिन इस समय आम तौर पर दाम बढ़ते हैं और इस साल बढ़ोतरी ज्यादा देखने को मिल रही है.

धान का MSP बढ़ना भी बड़ी वजह

केंद्र सरकार ने 2026-27 फसल वर्ष के लिए सामान्य धान का MSP बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. पिछले साल किसानों को 2,369 रुपये प्रति क्विंटल MSP मिला था. यानी इस बार धान के MSP में 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. धान की कीमत बढ़ने का असर सीधे चावल के दाम पर भी पड़ता है, क्योंकि मिलिंग के बाद इसी धान से चावल तैयार होता है. कारोबारियों के मुताबिक, धान महंगा होने की वजह से चावल की कीमत में करीब 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसका असर आने वाले दिनों में आम लोगों की रसोई के बजट पर भी पड़ सकता है.

मॉनसून की कमी ने बढ़ाई चिंता

चावल की कीमतों में तेजी की एक वजह मॉनसून को भी माना जा रहा है. 7 अगस्त तक देश में मॉनसून सामान्य से 11 फीसदी कम बताया गया है. बारिश की कमी से धान की आने वाली फसल को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है. इसके अलावा गर्मी और रबी सीजन की फसलों की आवक लगभग खत्म हो चुकी है. खरीफ की नई फसल की आवक अक्टूबर के बाद शुरू होगी. ऐसे में तब तक बाजार में मौजूदा स्टॉक पर ही ज्यादा निर्भरता रहेगी.

प्रीमियम चावल के दाम भी बढ़े

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर चेन्नई के एक कारोबारी का कहना है कि, पुराने सफेद चावल की कीमत करीब 1,900 रुपये प्रति 26 किलो बैग तक पहुंच गई है, जबकि नए चावल का भाव करीब 1,600 रुपये है. पश्चिम बंगाल में मिलने वाली स्वर्णा किस्म की कीमत भी कुछ हफ्तों में 30 रुपये से बढ़कर करीब 34 रुपये प्रति किलो हो गई है. बाजार में प्रीमियम सफेद, पारबॉयल्ड और स्टीम्ड चावल के दाम में भी तेजी आई है.

सरकार के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद क्यों बढ़ रहे दाम?

कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, देश में चावल का उत्पादन 15.402 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है. वहीं 1 जुलाई तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास चावल और धान का बड़ा स्टॉक भी मौजूद था. इसके बावजूद बाजार में कीमतों का बढ़ना मांग-सप्लाई के अंतर की ओर इशारा कर रहा है. जानकारों का मानना है कि सरकारी आंकड़ों और बाजार में वास्तविक उपलब्धता के बीच अंतर भी कीमतों को प्रभावित कर सकता है.

आगे कीमतें कम होने की उम्मीद

कारोबारियों के मुताबिक, अगर सरकार की ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत चावल की बिक्री तेज होती है तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. हालांकि, फिलहाल चावल की क्वालिटी को लेकर खरीदारों की कुछ चिंताएं हैं, जिससे सरकारी नीलामी में अपेक्षित रुचि नहीं दिख रही है. फिलहाल खरीफ फसल की नई आवक शुरू होने तक चावल की कीमतों पर मॉनसून, धान की उपलब्धता और सरकारी स्टॉक की बिक्री का असर बना रहेगा. अगर सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को चावल के लिए और ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है.

Published: 8 Aug, 2026 | 09:45 AM

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