प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मध्य प्रदेश में इन दिनों गंदगी से दूभर हो रही जिंदगी, चर्चा का विषय बनी हुई है. देश के सबसे साफ शहर का तमगा हासिल करने वाले शहर इंदौर में गंदा पानी पीने से दर्जनभर से ज्यादा लोगों की मौत के मामले से चर्चाओं का बाजार गर्म है. इस बीच मध्य प्रदेश गंदे पानी के एक और संकट से घिर गया है. गंदे पानी का यह संकट एमपी के शहरों की सीमा को पार करके अब गांवों तक पहुंच गया है.
सरकारी रिपोर्ट में 37 फीसदी सैंपल मानक पर खरे नहीं उतरे
सरकार की अपनी ही एक रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि अब समूचे एमपी में इस्तेमाल किया जा रहा पेयजल सुरक्षित नहीं रह गया है. केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन से जुड़ी एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि एमपी में शहरों के बाद अब सुरक्षित पेयजल का संकट राज्य के एक तिहाई से ज्यादा गांवों तक पहुंच गया है. जल जीवन मिशन के तहत पूरे राज्य में ग्रामीण इलाकों से लिए लिए गए सैंपल के परीक्षण में 36.7 फीसदी इलाकों के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं. इससे जुड़ी रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था जोखिम से भरे दौर में पहुंच गई है.
इंदौर के साथ अन्य जिलों के ग्रामीण इलाकों में खराब पानी
जल जीवन मिशन के तहत हर घर को नल से जोड़ने के बाद नल से पानी की आपूर्ति के प्रभाव को दर्शाने वाली रिपोर्ट में एमपी के ग्रामीण इलाकों की चिंताजनक रिपोर्ट उजागर हुई है. पिछले महीने दिसंबर में जारी की गई इस रिपोर्ट में पूरे राज्य से ग्रामीण इलाकों के 15,094 घरों से पेयजल के सैंपल लिए गए थे. इनमें पाया गया कि जानलेवा पेयजल की मार से जूझ रहे इंदौर जिले के ग्रामीण इलाकों में मात्र 33 प्रतिशत घरों तक साफ पेयजल पहुंच पा रहा है. पेयजल की उपलब्धता का यह स्तर आधिकारिक रूप से तय की गई सीमा से काफी कम है. राज्य के सिर्फ अलीराजपुर, बड़वानी, झाबुआ, नरसिंहपुर और सीधी जिलों के ग्रामीण अंचल में पेयजल की शत प्रतिशत आपूर्ति पाई गई है. जबकि अनूपपुर, डिंडोरी, पन्ना, रीवा और उमरिया जिलों में यह स्तर शून्य पाया गया है.
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गांवों में नलों की फिटिंग की पर जलापूर्ति शुरू नहीं हुई
इनके अलावा ग्वालियर में मात्र 20.9 प्रतिशत, अशोकनगर में 21.9 प्रतिशत, मुरैना में 25.2 प्रतिशत, दमोह में 33.5 प्रतिशत, खंडवा में 35.2 प्रतिशत, उज्जैन में 35.3 प्रतिशत, शिवपुरी में 36.4 प्रतिशत, भोपाल में 56.9 प्रतिशत और जबलपुर में 54.3 प्रतिशत ग्रामीण घरों में सुरक्षित पेयजल की नल से आपूर्ति हो रही है. अध्ययन में पाया गया है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक चौथाई से कम यानी 23.4 प्रतिशत घरों को नियमित रूप से साफ पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. इन घरों में यदाकदा ही नल से जल पहुंच पाता है. जबकि राज्य के गांवों में 36.7 प्रतिशत घर ऐसे भी पाए गए जिनमें नल की फिटिंग तो हो गई है, लेकिन इनसे पानी की आपूर्ति अब तक शुरू नहीं हो पाई है. स्पष्ट है कि एमपी में अभी भी सरकार को साफ और सुरक्षित पेयजल की सुविधा से हर घर को जोड़ने में लंबा सफर तय करना है.