Tamil Nadu Budget: TVK के पहले बजट से मछुआरे निराश, सिर्फ एक वादा पूरा.. बाकी मांगें अधूरी!

तमिलनाडु की TVK सरकार के पहले बजट में मछुआरों के लिए सिर्फ एक चुनावी वादा पूरा हुआ. लीन फिशिंग पीरियड सहायता राशि बढ़ाई गई, लेकिन डीजल सब्सिडी, भारत-श्रीलंका मछुआरा विवाद और अन्य मांगों पर कोई घोषणा नहीं हुई. मछुआरा संगठनों ने बजट पर निराशा जताते हुए सरकार से लंबित वादे पूरे करने की मांग की.

Kisan India
नोएडा | Published: 6 Aug, 2026 | 11:44 AM

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी TVK ने विधानसभा चुनाव से पहले मछुआरा समुदाय के लिए कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार के पहले बजट में इनमें से सिर्फ एक वादा ही पूरा हो पाया है. बजट में पारंपरिक मछुआरा परिवारों को मछली पकड़ने पर रोक की अवधि के दौरान मिलने वाली सहायता राशि 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी गई है. हालांकि, मछुआरा संगठनों का कहना है कि डीजल सब्सिडी, भारत-श्रीलंका मछुआरा विवाद और अन्य मांगों पर बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं हुई.

वहीं, चुनावी वादे के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नौकाएं खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण  देने की बात कही गई थी. लेकिन बजट में इसके बजाय पारंपरिक मछुआरों को ऐसी नावें खरीदने पर ब्याज सब्सिडी देने के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा दिया जा सके. मछुआरा संगठनों ने TVK सरकार के पहले बजट में भारत-श्रीलंका मछुआरा विवाद और ईंधन सब्सिडी बढ़ाने को लेकर कोई घोषणा नहीं होने पर निराशा जताई है.

200 नावें अभी भी श्रीलंका के कब्जे में हैं

भारतीय राष्ट्रीय मछुआरा संघ के आरएमपी राजेंद्र नट्टार ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि लीन फिशिंग पीरियड की सहायता राशि बढ़ाने का स्वागत है, लेकिन भारत-श्रीलंका मछुआरा मुद्दा अभी भी सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है. उन्होंने कहा कि करीब 200 नावें अभी भी श्रीलंका के कब्जे में हैं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई बात नहीं की. वहीं, तमिलनाडु फिशरमैन फेडरेशन के महासचिव ए. ताजुद्दीन ने कहा कि TVK के चुनावी घोषणापत्र में डीजल सब्सिडी की सीमा 1,900 लीटर से बढ़ाकर 3,500 लीटर करने और मछली पकड़ने पर प्रतिबंध अवधि की सहायता राशि 8,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये करने का वादा किया गया था.

उन्होंने कहा कि मछुआरों को उम्मीद थी कि ये वादे बजट में पूरे होंगे, लेकिन ऐसा नहीं होने से उन्हें निराशा हुई है. मछुआरों ने कहा है कि डीजल पर मिलने वाली सब्सिडी की सीमा बढ़ाने से मैकेनाइज्ड नाव और ट्रॉलर संचालकों को बड़ी राहत मिल सकती थी. बढ़ती ईंधन कीमतों और डीजल की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता के बीच मछुआरों की लागत लगातार बढ़ रही है.

मछुआरे 102 रुपये लीटर खरीद रहे डीजल

नागपट्टिनम के मछुआरे एम. कर्णन ने बताया कि फिलहाल मछुआरे खुदरा दुकानों  से करीब 102 रुपये प्रति लीटर की दर से डीजल खरीद रहे हैं. इससे पहले पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कीमतें बढ़ने से पहले डीजल का भाव करीब 92 रुपये प्रति लीटर था. उन्होंने कहा कि सब्सिडी वाला डीजल करीब 83 रुपये प्रति लीटर मिलता है. ऐसे में यदि मासिक सब्सिडी कोटा बढ़ाकर 3,500 लीटर कर दिया जाता है तो परिचालन खर्च में काफी कमी आएगी.

मछुआरों ने तटीय इलाकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई

मछुआरों ने तटीय इलाकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि बजट में कमजोर तटीय जिलों में 200 किलोमीटर लंबी समुद्री कटाव रोधी संरचनाएं बनाने की योजना पर कोई घोषणा नहीं की गई. इसमें नागपट्टिनम, कुड्डालोर, विलुप्पुरम, रामनाथपुरम और कन्याकुमारी जैसे जिले शामिल हैं. इसके अलावा मछुआरा समुदाय के लिए आवास योजनाओं को लेकर भी बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया.

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