वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. सोमवार को न्यूयॉर्क के इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) में कच्ची चीनी का भाव 15 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड के पार पहुंच गया. कारोबारियों को आशंका है कि आने वाले समय में वैश्विक बाजार में चीनी की सप्लाई कम पड़ सकती है, जिससे कीमतों को समर्थन मिला है. हालांकि, कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तिमाही और अगली तिमाही में चीनी की कीमतों में नरमी आ सकती है. इसकी वजह भू-राजनीतिक तनाव कम होने और उम्मीद से बेहतर उत्पादन व सप्लाई रहने की संभावना है.
वहीं, अल नीनो और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता बनी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन कारणों से चीनी उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. मंगलवार को न्यूयॉर्क में अक्टूबर डिलीवरी वाली कच्ची चीनी का भाव 15.10 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड (331 डॉलर प्रति टन) रहा, जबकि लंदन में सफेद चीनी का भाव 475.50 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया. बाजार विश्लेषण करने वाली कंपनी Covrig Analytics ने अब वैश्विक चीनी बाजार में 3 लाख टन की कमी (घाटा) का अनुमान जताया है. इससे पहले कंपनी ने 1 लाख टन अधिशेष (सरप्लस) का अनुमान लगाया था. वहीं, Green Pool Commodity Specialists ने भी अपने अनुमान में बदलाव करते हुए चीनी का वैश्विक घाटा 33 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है, जबकि पहले यह 17.6 लाख टन बताया गया था.
पिछले साल की तुलना में करीब 11.3 फीसदी कम
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार विश्लेषण करने वाली एजेंसी BMI (Fitch Solutions) का अनुमान है कि चीनी की कीमतें इस साल औसतन 15.2 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड रह सकती हैं. यह पहली तिमाही के 14.6 सेंट और दूसरी तिमाही के 14.2 सेंट से अधिक है. हालांकि, एजेंसी ने पूरे 2026 के लिए अपने औसत मूल्य अनुमान को घटाकर 14.9 सेंट प्रति पाउंड कर दिया है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 11.3 फीसदी कम है.
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण चीनी के दाम मजबूत
BMI के अनुसार, साल की शुरुआत में अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण चीनी के दाम मजबूत हुए थे. 24 मार्च को कच्ची चीनी का भाव 15.9 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड के साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था. इसके बाद जुलाई के अंत तक कीमतों में करीब 8.8 फीसदी की गिरावट आई. वहीं, डच वित्तीय सेवा कंपनी ING की रिसर्च इकाई ING Think का अनुमान है कि इस साल कच्ची चीनी का औसत भाव 15.40 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड रह सकता है. संस्था का कहना है कि तीसरी तिमाही में कीमतों पर सबसे ज्यादा दबाव रह सकता है, क्योंकि इसी दौरान ब्राजील में गन्ने की सबसे अधिक पेराई और चीनी उत्पादन होता है, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है.
चीनी उत्पादन घटकर 1849 लाख टन रहने का अनुमान है
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले 2026-27 सीजन में वैश्विक चीनी उत्पादन घटकर 1849 लाख टन रहने का अनुमान है. इसकी मुख्य वजह ब्राजील, यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका और थाईलैंड में उत्पादन कम रहने की संभावना है. सर्च एजेंसी BMI का अनुमान है कि 2026-27 सीजन में वैश्विक चीनी का अधिशेष (सरप्लस) घटकर 28 लाख टन रह जाएगा, जबकि 2025-26 सीजन में यह 70 लाख टन रहने का अनुमान है. एजेंसी के मुताबिक, वैश्विक चीनी उत्पादन में करीब 2.3 फीसदी की गिरावट आ सकती है और यह 1824 लाख टन रह सकता है. वहीं, चीनी की खपत लगभग 1796 लाख टन पर स्थिर रहने की उम्मीद है.