Baisakhi: पंजाब के अमृतसर में इस बार भी बैसाखी का पर्व बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया. खेतों में सुनहरी गेहूं की लहलहाती बालियां इस बात का संकेत दे रही थीं कि सालभर की मेहनत अब रंग ला चुकी है. किसानों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ फसल की कटाई शुरू की और इस सफलता का जश्न पूरे जोश के साथ मनाया. बैसाखी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह पंजाबी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है.
इस अवसर पर गांवों में ढोल-नगाड़ों की गूंज, भांगड़ा और गिद्धा जैसे पारंपरिक नृत्य ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया. लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते नजर आए और घरों में पारंपरिक व्यंजन भी बनाए गए.
#WATCH | Amritsar, Punjab: Farmers in Amritsar celebrate Baisakhi by harvesting the wheat crop. The festival marks the Punjabi New Year and symbolises prosperity and gratitude for a good Rabi harvest. pic.twitter.com/PAgMd5Zg5h
और पढ़ें— ANI (@ANI) April 14, 2026
असम में बोहाग बिहू की शुरुआत और गोरु बिहू का महत्व
असम में बोहाग बिहू के पहले दिन गोरु बिहू मनाया जाता है, जो कृषि संस्कृति का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है. लखीमपुर और गोलाघाट जैसे इलाकों में लोग अपने पशुओं की पूजा और देखभाल करते हुए इस दिन को खास बनाते नजर आए. इस अवसर पर किसान अपने बैलों और गायों को नदी या तालाब में ले जाकर नहलाते हैं, उन्हें साफ करते हैं और अच्छे भोजन के साथ उनका सम्मान करते हैं. यह परंपरा पशुओं के स्वास्थ्य, समृद्धि और कृषि कार्यों में उनकी भूमिका के प्रति आभार प्रकट करने का तरीका है.
पशुधन के प्रति सम्मान की अनोखी परंपरा
गोरु बिहू के दिन विशेष रूप से हल चलाने वाले बैलों और दूध देने वाली गायों की पूजा की जाती है. ग्रामीण मानते हैं कि ये पशु उनकी आजीविका का आधार हैं, इसलिए उनका सम्मान करना बेहद जरूरी है. कई जगहों पर ‘खिराती’ गायों को भी विशेष रूप से सजाया और संवारा जाता है. यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश भी देती है. किसान इस दिन अपने पशुओं को नई रस्सी, चारा और साफ-सफाई देकर उनके प्रति अपना आभार जताते हैं.
#WATCH | Assam: Visuals of people in Lakhimpur celebrating Goru Bihu on the first day of Bohag Bihu
On this special day, considered one of the most significant celebrations in a farmer’s life, the villagers clean and bathe their ploughing bulls and dairy cows, including the… pic.twitter.com/IE8ZfHaONU
— ANI (@ANI) April 14, 2026
कृषि संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव
बैसाखी और बोहाग बिहू जैसे त्योहार भारत की कृषि संस्कृति को जीवंत रखते हैं. ये पर्व न केवल फसल की खुशी का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि किसान और प्रकृति के बीच का रिश्ता कितना गहरा है. फसल कटाई की खुशी, पशुओं के प्रति सम्मान और सामूहिक उत्सव ये सभी मिलकर ग्रामीण भारत की असली तस्वीर पेश करते हैं.
देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाए जाने वाले ये कृषि पर्व हमें यह संदेश देते हैं कि खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार है. बैसाखी और बोहाग बिहू जैसे त्योहार किसानों की मेहनत, आस्था और प्रकृति के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को सम्मानित करते हैं.