पैकेज्ड फूड में नमक-चीनी की मात्रा बताने में देरी क्यों? क्या सरकार नहीं चाहती लोग स्वस्थ रहें- SC

SC slams FSSAI over packaged food Warning Label : सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई कर रही पीठ ने FSSAI पर सख्त टिप्पणी करते हुए देरी पर सवाल पूछा है. पीठ ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि किसी खाद्य उत्पाद में चीनी, नमक और फैट की मात्रा कितनी है.

नोएडा | Updated On: 14 Aug, 2026 | 01:59 PM

पैकेज्ड फूड में नमक, चीनी, फैट आदि की मात्रा की स्पष्टता नहीं होने पर सुप्रीमकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीमकोर्ट ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी वाले लेबल लगाने में देरी के लिए बृहस्पतिवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से नाराजगी जताई और पूछा कि क्या सरकार ‘नहीं चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें’.

चेतावनी लेबल में कई तत्वों की मात्रा बताने में देरी पर फटकार

पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की जानकारी देने वाले फ्रंट ऑफ पैक (FOPL) चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से कड़ी नाराजगी जताई है. शीर्ष अदालत ‘3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ नाम के एक सार्वजनिक परमार्थ न्यास की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैकेज्ड फूड पर अनिवार्य रूप से ‘फ्रंट-ऑफ-पैकेज वार्निंग लेबल’ (FOPL) लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.

सरकार कदम नहीं उठाती है तो हम खुद आदेश जारी करेंगे- पीठ

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि किसी खाद्य उत्पाद में चीनी, नमक और फैट की मात्रा कितनी है. कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है तो उसे खुद आदेश जारी करने पर विचार करना पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि ऐसी व्यवस्था लागू करने में इतनी हिचकिचाहट क्यों हो रही है. कोर्ट ने FSSAI से यह भी पूछा कि पहले दिए गए निर्देशों के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. सुनवाई के दौरान अदालत ने यहां तक सवाल किया कि क्या खाद्य उत्पाद बनाने वाली बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के दबाव की वजह से चेतावनी लेबल लागू करने में देरी हो रही है.

FSSAI की दलील को कोर्ट ने खारिज किया

वहीं, FSSAI की ओर से दलील दी गई कि अगर इस तरह के चेतावनी लेबल खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य किए जाते हैं तो नमकीन जैसे कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ भी ज्यादा नमक, चीनी या फैट वाले उत्पादों की श्रेणी में आ सकते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुआ. अदालत ने जनस्वास्थ्य का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि क्या सरकार चाहती है कि देश के लोग, खासकर बच्चे, स्वस्थ न रहें.

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी FSSAI को जनस्वास्थ्य के हित में पैकेज्ड फूड पर स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने की व्यवस्था पर विचार करने को कह चुका है. अदालत का जोर इस बात पर है कि उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पाद खरीदते समय यह आसानी से पता चल सके कि उसमें चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कितनी है, ताकि वे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बेहतर विकल्प चुन सकें.

Published: 14 Aug, 2026 | 01:50 PM

Topics: