Palm Oil: भारत में खाद्य तेल की मांग एक बार फिर तेज़ हो गई है. जुलाई 2026 में देश का कुल खाद्य तेल आयात बढ़कर 14.81 लाख टन पहुंच गया, जबकि जून में यह 11.11 लाख टन था. यानी केवल एक महीने में आयात में 33.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस उछाल के पीछे पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की बढ़ती मांग को मुख्य वजह माना जा रहा है. उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि चालू तेल वर्ष में कुल आयात भी पिछले वर्ष की तुलना में ऊंचे स्तर पर बना हुआ है.
पाम और सोयाबीन तेल ने बढ़ाई आयात की रफ्तार
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में पाम ऑयल का आयात 7.30 लाख टन रहा, जो जून के 4.87 लाख टन की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है. वहीं सोयाबीन तेल का आयात 3.80 लाख टन से बढ़कर 4.98 लाख टन पहुंच गया, जिसमें 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग और रिफाइनिंग उद्योग की बढ़ती जरूरतों के कारण दोनों तेलों की खरीद में तेजी आई है. यही वजह है कि जुलाई का आयात पिछले कई महीनों की तुलना में सबसे मजबूत रहा.
चालू तेल वर्ष में कुल आयात भी 5 फीसदी बढ़ा
तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर से अक्टूबर) के पहले नौ महीनों में भारत ने 119.23 लाख टन खाद्य तेल आयात किया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 113.46 लाख टन था. यानी कुल आयात में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इस अवधि में पाम ऑयल आयात 11.5 प्रतिशत और सनफ्लावर ऑयल 9.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सोयाबीन तेल आयात 5.6 प्रतिशत घटा. इससे साफ है कि भारत की आयात टोकरी में पाम ऑयल की हिस्सेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है.
नेपाल से ड्यूटी फ्री रिफाइंड तेल की सप्लाई जारी
बिजनेस लाइन के अनुसार, नेपाल से भारत को रिफाइंड खाद्य तेल का आयात लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. नवंबर से मई के बीच नेपाल ने लगभग 3.93 लाख टन रिफाइंड तेल भारत भेजा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा रिफाइंड सोयाबीन तेल का रहा. जून में नेपाल से करीब 56 हजार टन और जुलाई में 61 हजार टन रिफाइंड तेल भारत आया. नेपाल को SAFTA समझौते के तहत भारत में शून्य आयात शुल्क का लाभ मिलता है, जिससे उसकी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है.
किन देशों से सबसे ज्यादा आया खाद्य तेल और कीमतों का क्या हाल?
चालू तेल वर्ष के पहले नौ महीनों में अर्जेंटीना भारत का सबसे बड़ा खाद्य तेल आपूर्तिकर्ता रहा, जिसने 27.35 लाख टन तेल निर्यात किया. इसके बाद मलेशिया (22.61 लाख टन) और इंडोनेशिया (22.36 लाख टन) प्रमुख पाम ऑयल आपूर्तिकर्ता रहे, जबकि रूस सनफ्लावर ऑयल का बड़ा स्रोत बना रहा. कीमतों की बात करें तो जुलाई 2025 की तुलना में क्रूड पाम ऑयल 13 फीसदी, RBD पामोलीन 9 फीसदी, सोयाबीन तेल 8 फीसदी और सनफ्लावर ऑयल 20 फीसदी महंगा हो चुका है. साथ ही पिछले एक वर्ष में रुपये में 11 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी ने आयातकों और रिफाइनिंग उद्योग की लागत पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है.