Edible Oil Imports: भारत का खाद्य तेल आयात बिल इस साल नया रिकॉर्ड बना सकता है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) का अनुमान है कि तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर-अक्टूबर) के अंत तक देश का खाद्य तेल आयात बिल बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि, मौजूदा तेल वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों (नवंबर से जून) में भारत ने 104 लाख टन से अधिक खाद्य तेल का आयात कर लिया है. इस दौरान आयात बिल 99,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.19 लाख करोड़ रुपये हो गया. यानी सिर्फ आठ महीनों में करीब 20,000 करोड़ रुपये (20.2 फीसदी) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, SEA के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने सदस्यों को लिखे अपने मासिक पत्र में कहा कि भारत खाद्य तेल के मामले में एक अहम मोड़ पर खड़ा है और बढ़ती आयात निर्भरता अब चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है. उन्होंने कहा कि पिछले तेल वर्ष में भारत का खाद्य तेल आयात बिल 1.61 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन इस साल इसके 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है. संजीव अस्थाना ने कहा कि खाद्य तेल के आयात पर बढ़ता खर्च सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि इससे देश का बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज) बाहर जा रहा है. उनका कहना है कि इस पैसे का इस्तेमाल भारत के कृषि ढांचे को मजबूत करने में किया जा सकता था.
सामान्य से कम मॉनसून का अनुमान
उन्होंने कहा कि रुपये की कमजोरी से खाद्य तेल का आयात और महंगा हो गया है. वहीं, सामान्य से कम मॉनसून के अनुमान और कई तिलहन उत्पादक क्षेत्रों में बुवाई में देरी के कारण घरेलू उत्पादन को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. अस्थाना ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात भी दबाव बढ़ा रहे हैं. इंडोनेशिया में बायोडीजल कार्यक्रम के विस्तार की वजह से पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा खाने की बजाय ईंधन के लिए इस्तेमाल हो रहा है. इससे वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की उपलब्धता कम हो रही है. इसके अलावा, भूराजनीतिक तनाव, माल ढुलाई (फ्रेट) और बीमा लागत बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है.
- तिलहन किसानों के लिए अच्छी खबर, बेहतर दामों से बढ़ा किसानों का उत्साह, खरीफ में रकबा बढ़ने के आसार
- आग लगाने से 700 एकड़ गेहूं की फसल जलकर खाक, पूर्व CM ने की मुआवजे की मांग
- प्याज पैदावार में 29 फीसदी गिरावट की आशंका, रकबा भी हुआ कम.. बारिश से फसल चौपट
- UP में किसानों से होगी 20 लाख टन आलू की खरीद, सरकार से मिली मंजूरी.. इतने रुपये क्विंटल होगा रेट
खाद्य तेल आयात करना पड़ सकता है
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में भारत को ज्यादा मात्रा में खाद्य तेल आयात करना पड़ सकता है और हर टन के लिए पहले से ज्यादा कीमत भी चुकानी पड़ सकती है. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की दीर्घकालिक जरूरत आयात बढ़ाना नहीं, बल्कि घरेलू खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाना है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने कहा कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून समान रूप से सक्रिय नहीं रहा है. कई तिलहन उत्पादक क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.
सूरजमुखी की बुवाई पिछले साल की तुलना में धीमी रही
उन्होंने कहा कि खरीफ बुवाई के शुरुआती आंकड़े भी इसका असर दिखा रहे हैं. मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी की बुवाई पिछले साल की तुलना में धीमी रही है. 17 जुलाई तक देश में कुल 147 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह 155.7 लाख हेक्टेयर थी. यानी इस बार 8.6 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हुई है. अस्थाना ने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता अगस्त-सितंबर की है, क्योंकि इसी दौरान तिलहन फसलों में फूल आने का महत्वपूर्ण समय होता है. अगर इस अवधि में भी बारिश कम रही तो फसल की पैदावार घट सकती है. साथ ही जलाशयों में पानी का स्तर भी कम रह सकता है, जिसका असर अगली रबी फसल पर भी पड़ सकता है.