Monsoon Forecast: भारत में इस साल मॉनसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में खरीफ सीजन की खेती को लेकर किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है. क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल खरीफ क्षेत्र पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन फसल उत्पादन काफी हद तक बारिश की स्थिति पर निर्भर करेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई किसान मक्का की खेती छोड़कर कपास, सोयाबीन, धान और रागी जैसी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं.
खरीफ बुवाई पर रहेगा मॉनसून का बड़ा असर
भारत में जून से सितंबर के बीच होने वाली मॉनसूनी बारिश पूरे साल की कुल वर्षा का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा होती है. यही समय खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. यदि इस दौरान बारिश कम होती है या समय पर नहीं होती, तो फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. हालांकि देश में इस समय जलाशयों और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है. इससे खेतों की तैयारी और बुवाई समय पर हो सकती है. लेकिन अच्छी पैदावार के लिए केवल पानी का भंडार काफी नहीं है, बल्कि सही समय और सही जगह पर बारिश होना भी जरूरी है.
उत्पादन तय करेंगे ये तीन बड़े कारक
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार इस साल फसल उत्पादन मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करेगा. पहला, बारिश का वितरण यानी किस क्षेत्र में कितनी और कब बारिश होती है. दूसरा, फसलों में लगने वाले कीट और बीमारियों पर नियंत्रण. तीसरा, किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक यानी खाद उपलब्ध होना. अगर इन तीनों क्षेत्रों में स्थिति बेहतर रहती है, तो कमजोर मॉनसून के बावजूद उत्पादन को काफी हद तक संभाला जा सकता है. लेकिन किसी भी एक क्षेत्र में समस्या आने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
अल नीनो बढ़ा सकता है किसानों की चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 का खरीफ सीजन अल नीनो के प्रभाव में रह सकता है. अल नीनो एक ऐसी मौसमीय स्थिति है, जो अक्सर भारत में कम बारिश का कारण बनती है. वर्ष 1950 के बाद से 16 अल नीनो वर्षों में से 7 बार देश में सामान्य से कम मॉनसून और सूखे जैसी स्थिति देखने को मिली है. इसी कारण भारतीय मौसम विभाग (IMD) और कृषि विशेषज्ञ अल नीनो पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. मौसम विभाग ने भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है.
किसान बदल सकते हैं फसल का विकल्प
कम बारिश की आशंका को देखते हुए कई किसान अपनी फसल रणनीति बदल सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का की तुलना में कपास, सोयाबीन, धान और रागी जैसी फसलें किसानों को बेहतर विकल्प लग सकती हैं. इसलिए आने वाले हफ्तों में इन फसलों के रकबे में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. कुल मिलाकर, इस साल खरीफ सीजन की तस्वीर मॉनसून के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी. यदि बारिश का वितरण संतुलित रहा तो किसानों को राहत मिल सकती है, लेकिन कमजोर मॉनसून और अल नीनो का असर कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती बना रहेगा.