उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में गन्ने के किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए एक नया सेंटर बनाया जाएगा. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने इसको लेकर ICAR-इंडियन शुगरकेन रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-ISRI), लखनऊ के साथ समझौता किया है. यह सेंटर लखनऊ स्थित ICAR-ISRI कैंपस में बनाया जाएगा. इसके निर्माण और विकास पर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इस राशि को ISMA और ICAR 50:50 के आधार पर साझा करेंगे. ICAR अपनी सेवाओं और तकनीकी सहयोग के जरिए योगदान देगा, जबकि ISMA जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने में निवेश करेगा.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य रोगमुक्त, शुद्ध और अधिक पैदावार देने वाले गन्ने के बीज तैयार करना और किसानों तक पहुंचाना है. इससे कीट और रोग प्रभावित किस्मों को धीरे-धीरे बदला जा सकेगा. किसानों को नई किस्मों के चयन और खेती से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी भी मिलेगी. ISMA के मुताबिक, बेहतर बीज मिलने से गन्ने की उत्पादकता और चीनी की रिकवरी बढ़ सकती है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
गन्ने के बीज की गुणवत्ता पर रहेगी नजर
प्रस्तावित सेंटर में गन्ने के बीज की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाएगी. खेतों में बीज और गन्ने की किस्मों के प्रदर्शन का आकलन भी होगा. इसके अलावा गन्ना विकास से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बेहतर किस्मों को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाया जा सके. सेंटर के जरिए उन्नत, प्रमाणित और नई गन्ना किस्मों की गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उत्पादन और समय पर सप्लाई सुनिश्चित करने की योजना है. इसके लिए हर साल कितनी मात्रा में बीज तैयार किया जाएगा, इसकी क्षमता तय की जाएगी. यहां नई और बेहतर गन्ना किस्मों को वैज्ञानिक तरीके से तेजी से तैयार और बढ़ाया जाएगा. इसके लिए सुरक्षित और नियंत्रित खेती की तकनीकों का इस्तेमाल होगा. ISMA के मुताबिक, इससे किसानों को बेहतर बीज समय पर मिलेंगे और गन्ने की खेती को ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी.
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पुरानी किस्मों की जगह आएंगी बेहतर वैरायटी
प्रस्तावित सेंटर के जरिए चीनी मिलों के क्षेत्रों में गन्ने की पुरानी किस्मों को धीरे-धीरे बेहतर किस्मों से बदलने और फसल में विविधता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. इससे गन्ने की पैदावार और चीनी की रिकवरी बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही, लंबे समय तक गन्ने की खेती को टिकाऊ बनाने पर भी काम किया जाएगा. सेंटर की खासियत रोगमुक्त गन्ने के बीज तैयार करना होगी. बीज की गुणवत्ता और उसकी आनुवंशिक शुद्धता बनाए रखने के लिए नियमित जांच और प्रमाणन किया जाएगा. बीज की हर खेप को टैग किया जाएगा और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था होगी.
अच्छे बीज से बढ़ेगी पैदावार और चीनी रिकवरी
कृषि मंत्रालय ने पहले ही Seed Net पोर्टल के जरिए बीजों की ट्रेसबिलिटी की व्यवस्था शुरू की है. इसके तहत बीज की पैकिंग पर दिए गए QR कोड को स्कैन करके उसकी किस्म और अन्य जानकारी हासिल की जा सकती है. ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि गन्ना किसानों को हर पहल के केंद्र में रखना जरूरी है. उनके मुताबिक, अच्छी गुणवत्ता की रोपण सामग्री बेहतर पैदावार, चीनी की ज्यादा रिकवरी और किसानों की आय बढ़ाने की पहली सीढ़ी है. उन्होंने कहा कि ICAR-ISRI के साथ यह साझेदारी वैज्ञानिक शोध को किसानों तक पहुंचाने में मदद करेगी.