त्योहारों से पहले चीनी पर बड़ा फैसला, सरकार ने घटाई स्टॉक लिमिट.. जानें 1 सितंबर से क्या बदलेगा

Sugar Supply: चीनी की रिकॉर्ड बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने बड़े डीलरों और खरीदारों पर स्टॉक लिमिट और सख्त कर दी है. हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबारी अब 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे. यह नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा.

नोएडा | Published: 20 Aug, 2026 | 07:40 AM

Sugar Stock Limit: देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ने के बाद सरकार ने इसकी सप्लाई बढ़ाने और बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने ऐसे डीलरों और थोक खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा और कम कर दी है, जो हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करते हैं. अब ये कारोबारी एक समय में 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे. सरकार का यह नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक जारी रहेगा. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश में चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं और आने वाले महीनों में त्योहारों के कारण इसकी मांग और बढ़ने की उम्मीद है.

पहले 30 दिन का स्टॉक रखने की थी सीमा

चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार पहले ही डीलरों को 30 दिन से ज्यादा का स्टॉक रखने से रोक चुकी थी. लेकिन इसके बावजूद पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में करीब 10 फीसदी की तेजी आ गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में सप्लाई कम होने और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की वजह से कीमतों पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में सरकार ने अब स्टॉक रखने की समय सीमा को आधा कर दिया है. सरकार का मानना है कि इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और बड़े कारोबारी जरूरत से ज्यादा माल जमा नहीं कर पाएंगे.

त्योहारों से बढ़ने वाली है चीनी की मांग

भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग आम तौर पर बढ़ जाती है. इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं. मिठाइयों और दूसरे खाद्य सामानों की बिक्री बढ़ने के साथ चीनी की खपत भी बढ़ जाती है. बिस्किट, मिठाई और कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां भी त्योहारों से पहले बड़ी मात्रा में चीनी खरीदकर रखती हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में चीनी की मांग और बढ़ सकती है. सरकार को डर है कि, अगर कारोबारी ज्यादा स्टॉक जमा करने लगे तो बाजार में सप्लाई और कम हो सकती है और दाम और ऊपर जा सकते हैं.

चीनी की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर क्यों पहुंची?

चीनी के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह गन्ने की फसल पर मौसम का असर भी माना जा रहा है. कई इलाकों में बारिश सामान्य नहीं रही और कुछ जगहों पर सूखे जैसे हालात बने. गन्ने की फसल को अच्छी पैदावार के लिए काफी पानी की जरूरत होती है. मौसम खराब रहने से फसल पर असर पड़ा है, जिससे आगे चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. इसी वजह से बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव बना हुआ है. जानकारों का मानना है कि आने वाले कम से कम तीन महीनों तक चीनी की कीमतें ऊंची रह सकती हैं.

सरकार की नजर सप्लाई बढ़ाने पर भी

चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार सिर्फ स्टॉक सीमा घटाने तक सीमित नहीं है. बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए चीनी के आयात से जुड़े विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है. जरूरत पड़ने पर सीमित मात्रा में शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता है. यहां चीनी सिर्फ त्योहारों और मिठाइयों की वजह से ही जरूरी नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में परिवार इसे रोजमर्रा के खाने-पीने में भी इस्तेमाल करते हैं. इसलिए चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी सीधे आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है.

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