चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने सरकार से मौजूदा स्टॉक का आधिकारिक आंकड़ा जारी करने की मांग की है. NFCSF के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे ने कहा कि 15 दिन के फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद चीनी के अनुमानित स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि मौजूदा सीजन के अंत में यानी 30 सितंबर तक चीनी का स्टॉक करीब 35 लाख टन रह जाने की आशंका है. यह स्टॉक अगले सीजन के शुरुआती दो महीनों यानी अक्टूबर-नवंबर की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. इससे बाजार में कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी है.
नाइकनावरे के मुताबिक, चीनी के स्टॉक की जानकारी सभी कारोबारियों और हितधारकों तक पहुंच गई है. साथ ही, तय कोटे से ज्यादा चीनी की बिक्री यानी ओवरसेलिंग भी हुई है. उन्होंने इन दोनों वजहों को मौजूदा कीमत बढ़ने का प्रमुख कारण बताया. हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्टॉक होल्डिंग लिमिट लगाने के बाद थोक बाजार में चीनी की कीमत कुछ कम हुई है. कीमत करीब 48 रुपये से घटकर 46 रुपये प्रति किलो हो गई है.
सुपर अल नीनो और ओवरसेलिंग से बढ़ी कीमतें
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी की कीमतों में अचानक तेजी ने सरकार और बाजार दोनों की चिंता बढ़ा दी है. उद्योग संगठन NFCSF के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे के मुताबिक, बाजार में चीनी की कमी की आशंका, सुपर अल नीनो का फसल पर संभावित असर और तय कोटे से ज्यादा बिक्री ने कीमतों को बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि चीनी की कमी को लेकर उपभोक्ताओं, मिलों, किसानों, कारोबारियों और सरकार समेत सभी पक्षों में धारणा बन गई है. इसके अलावा, सुपर अल नीनो का अगली फसल पर असर पड़ने की आशंका भी बाजार में चिंता बढ़ा रही है. वहीं, तय कोटे से ज्यादा चीनी बिकने से बाजार में असंतुलन पैदा हुआ है.
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दिल्ली-एनसीआर में चीनी 56 रुपये किलो तक पहुंची
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत 8 फीसदी, जबकि थोक कीमत 7 फीसदी बढ़ी है. हालांकि, दिल्ली-एनसीआर और कुछ अन्य इलाकों में कीमतों में इससे कहीं ज्यादा तेजी आई है. यहां चीनी का भाव करीब 55-56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि एक महीने पहले यह 46-48 रुपये किलो था. 12 अगस्त को दिल्ली में चीनी की औसत कीमत 49 रुपये किलो दर्ज की गई थी. नाइकनावरे ने कहा कि यह तेजी सामान्य नहीं है. हालांकि, आने वाले महीनों में कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन इतनी जल्दी तेजी आना बाजार के लिए असामान्य है.
चीनी के स्टॉक पर सीमा लगाई गई
चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने के बाद सरकार ने 24 जुलाई को देश की सभी चीनी मिलों में स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कराने का फैसला किया था. यह प्रक्रिया 14 अगस्त तक पूरी की जानी थी. इसके अलावा, 28 जुलाई को चीनी के स्टॉक पर सीमा भी लगाई गई. इसके तहत 30 नवंबर तक कारोबारी एक समय में अधिकतम 400 टन चीनी ही रख सकते हैं.
अगले हफ्ते जारी हो सकता है चीनी स्टॉक का आधिकारिक आंकड़ा
चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच सरकार जल्द ही देश में मौजूद चीनी के वास्तविक स्टॉक का आंकड़ा जारी कर सकती है. NFCSF के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे ने कहा कि फिजिकल वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद अगले सप्ताह सरकार आधिकारिक स्टॉक आंकड़ा जारी कर सकती है. इससे बाजार में चल रही अटकलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.