भारत को यूरिया खरीद के लिए इस बार जून के मुकाबले करीब 12 फीसदी सस्ते ऑफर मिले हैं. कीमतों में यह गिरावट वैश्विक खाद बाजार के लिए राहत भरा संकेत है. इससे पता चलता है कि युद्ध के कारण यूरिया की सप्लाई पर बना दबाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की उपलब्धता बेहतर होने लगी है. सरकारी कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) ने पश्चिमी तट के लिए 10 लाख टन यूरिया खरीदने का टेंडर जारी किया था. इसके जवाब में करीब 31 लाख टन यूरिया की पेशकश मिली. कंपनियों ने इसके लिए 393.65 से 435 डॉलर प्रति टन की कीमत बताई.
इसी तरह, पूर्वी तट के लिए 7 लाख टन यूरिया की जरूरत के मुकाबले करीब 24 लाख टन की पेशकश मिली. यहां कीमत 390.25 से 435.50 डॉलर प्रति टन के बीच रही. RCF सरकार की ओर से यूरिया के आयात का काम भी करती है. जानकारों के मुताबिक, ज्यादा मात्रा में मिले ऑफर और कम कीमतें वैश्विक बाजार में यूरिया की उपलब्धता बढ़ने के संकेत हैं. इससे भारत के लिए यूरिया आयात की लागत कम होने की उम्मीद है.
करीब 91,500 रुपये प्रति टन का भुगतान
भारत ने अप्रैल में यूरिया की खरीद के लिए अधिकतम करीब 91,500 रुपये प्रति टन का भुगतान किया था. यह युद्ध से पहले की कीमतों के मुकाबले करीब दोगुना था. हालांकि, जून की खरीद में वैश्विक बाजार में यूरिया की उपलब्धता बढ़ने और मांग कमजोर पड़ने से कीमतें अप्रैल के मुकाबले आधे से भी कम रह गईं. यूरिया की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह फरवरी में शुरू हुआ युद्ध रही. युद्ध के बाद वैश्विक खाद व्यापार के लिए अहम हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है. इससे यूरिया समेत अन्य खाद की सप्लाई प्रभावित हुई और कीमतों में तेजी आई. वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता अब भी अटकी हुई है. दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं. ऐसे में वैश्विक खाद बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.
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खाद की बिक्री 13 फीसदी घटकर 77.44 लाख टन रह गई
वहीं, इस साल खरीफ फसलों की बुवाई के अहम महीने जुलाई में किसानों ने खाद का इस्तेमाल कम किया है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में कुल खाद की बिक्री 13 फीसदी घटकर 77.44 लाख टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी महीने 89.41 लाख टन खाद बिकी थी. इस दौरान यूरिया की बिक्री 9 फीसदी घटकर 49.28 लाख टन रह गई. DAP की बिक्री 1.4 फीसदी घटकर 10.7 लाख टन, MOP की बिक्री 21 फीसदी घटकर 1.95 लाख टन और कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री 29 फीसदी घटकर 15.51 लाख टन रह गई. खाद की बिक्री में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब किसान खरीफ फसलों की बुवाई करते हैं. इससे फसल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि, राहत की बात यह है कि खरीफ फसलों की कुल बुवाई अब सामान्य रकबे से 2 फीसदी से भी कम पीछे रह गई है.