चीनी के बढ़ते रेट पर लगेगा ब्रेक! सरकार ला सकती है साप्ताहिक कोटा, डिस्पैच सिस्टम भी होगा लागू

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री चीनी आयात, साप्ताहिक चीनी कोटा, रिलीज और डिस्पैच व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है. साथ ही व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट तय करने की भी तैयारी है, ताकि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और कीमतों पर नियंत्रण किया जा सके.

Kisan India
नोएडा | Published: 18 Jul, 2026 | 11:48 AM

Sugar Production: देश में चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठा सकती है. कहा जा रहा है कि सरकार जल्द ही साप्ताहिक चीनी कोटा और डिस्पैच व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है. इसका मकसद बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को काबू में रखना है. कारोबारियों के अनुसार, देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चीनी की एक्स-मिल कीमत जून में 3,800 रुपये प्रति क्विंटल थी. वहीं, 16 जुलाई तक यह बढ़कर 4,450 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई. यानी सिर्फ एक महीने में चीनी की कीमत में करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

न्यूज वेबसाइट चीनी मंडी की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार बिना किसी आयात शुल्क (ड्यूटी) के करीब 10 लाख टन चीनी आयात  करने पर भी विचार कर रही है. इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों पर काबू पाना है. इसके अलावा सरकार साप्ताहिक या पखवाड़े के आधार पर चीनी रिलीज और डिस्पैच व्यवस्था लागू करने के साथ-साथ व्यापारियों के स्टॉक की सीमा तय करने जैसे कदमों पर भी विचार कर रही है.

चीनी उत्पादन करीब 2.8 करोड़ टन रहने का अनुमान

हालांकि, 2025-26 चीनी सीजन में देश का चीनी उत्पादन बढ़कर करीब 2.8 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 2.62 करोड़ टन से अधिक है. इसके बावजूद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होने और मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी बनी हुई है. सरकार ने 2025-26 सीजन में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन अब तक सिर्फ 7.5 लाख टन चीनी का ही निर्यात  हुआ है. ऐसे में सरकार अब घरेलू जरूरत और उपलब्ध स्टॉक की समीक्षा कर रही है और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए चीनी आयात समेत अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है.

करीब 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति

वहीं, कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर करीब 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है. सरकार सिर्फ आयात ही नहीं, बल्कि मासिक चीनी रिलीज व्यवस्था की जगह साप्ताहिक और पखवाड़े (15 दिन) के आधार पर चीनी रिलीज और डिस्पैच सिस्टम लागू करने पर भी विचार कर रही है. इससे बाजार में चीनी की आपूर्ति नियमित बनी रहेगी और कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी.

2 लाख टन चीनी का आयात किया गया

साथ ही कहा ये भी जा रहा है कि सरकार व्यापारियों के लिए चीनी का स्टॉक  रखने की सीमा (स्टॉक लिमिट) तय करने पर भी विचार कर रही है. अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो यह सरकार की चीनी नीति में बड़ा बदलाव होगा. भारत पहले भी चीनी की कमी के समय आयात कर चुका है. 2009-10 में 41 लाख टन, 2012-13 में 15 लाख टन और 2017-18 में 2 लाख टन चीनी का आयात किया गया था.

रिफाइंड और कच्ची चीनी के आयात की अनुमति

वर्ष 2009 में चीनी की कमी के दौरान सरकार ने सफेद, रिफाइंड और कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी. साथ ही, मासिक रिलीज व्यवस्था की जगह साप्ताहिक और पखवाड़े की रिलीज व्यवस्था लागू की गई थी, ताकि बाजार में चीनी की नियमित आपूर्ति बनी रहे. उद्योग जगत के अनुसार, केंद्र सरकार चीनी बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है. अगर आने वाले दिनों में चीनी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार चीनी आयात और बाजार को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने का फैसला कर सकती है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़