Bottle Gourd Farming: गर्मी के मौसम में अगर किसान सही तरीके से खेती करें, तो कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. लौकी की खेती भी ऐसी ही फसल है, जो सही तकनीक अपनाने पर बंपर पैदावार देती है. NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, अगर किसान कुछ आसान तरीकों को अपनाएं, तो लौकी की फसल से लाखों की कमाई करना मुश्किल नहीं है.
बुवाई से पहले करें सही तैयारी
डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, लौकी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सबसे जरूरी होती है. किसानों को बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी भुरभुरी और उपजाऊ बन सके. इसके बाद खेत को समतल करके उसमें जरूरी पोषक तत्व मिलाने चाहिए. सही तैयारी से बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और पौधों की बढ़त अच्छी होती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
बेड विधि से बढ़ेगी पैदावार
लौकी की खेती में बेड विधि बहुत फायदेमंद मानी जाती है. इस तकनीक में खेत में ऊंची मेड़ बनाकर बीज बोए जाते हैं. इससे फल जमीन के सीधे संपर्क में नहीं आते, जिससे सड़ने की समस्या कम हो जाती है. साथ ही इस विधि से सिंचाई भी आसान हो जाती है और पानी की बचत होती है. बेड विधि अपनाने से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और उत्पादन भी ज्यादा मिलता है.
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जैविक खाद से बढ़ेगी गुणवत्ता
डॉ. मिश्रा बताते हैं कि किसानों को जैविक खेती पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. खेत में वर्मी कंपोस्ट या गोबर की सड़ी खाद का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है. इससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. आजकल जैविक सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए यह तरीका किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है.
कीट और रोगों से बचाव जरूरी
लौकी की फसल को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर कीट और रोग नियंत्रण भी जरूरी है. किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उचित दवाओं का छिड़काव करना चाहिए. इससे फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता. सही देखभाल और समय पर उपचार से फसल मजबूत रहती है और ज्यादा पैदावार देती है. ऐसे में अगर किसान सही तकनीक, जैविक खाद और उचित देखभाल अपनाएं, तो लौकी की खेती से कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. यह फसल किसानों के लिए गर्मियों में एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है.