चीनी की आवक में 22 फीसदी का उछाल, भरपूर स्टॉक के चलते राशन में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद

चालू चीनी मिलों की संख्या में भी थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई है और वर्तमान में 518 मिलें पेराई कर रही हैं, जबकि पिछले सीजन में इसी समय 500 मिलें चालू थीं. खूब गन्ने के उत्पादन के चलते इस बार अधिक चीनी मिलों को पेराई करनी पड़ रही है. वहीं, इंडस्ट्री ने चीनी मिलों के कैश फ्लो संकट को दूर करने के लिए चीनी के एमएसपी में बढ़ोत्तरी की मांग की है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 20 Jan, 2026 | 05:25 PM

देश में चीनी का उत्पादन नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है और भरपूर स्टॉक के चलते सालभर कीमतों में बढ़ोत्तरी की आशंका खत्म हो गई है. इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने 15 जनवरी तक देश में चीनी उत्पादन के आंकड़े जारी किए हैं. चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र ने पहला स्थान हासिल किया है और दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश. इस्मा ने कहा कि गन्ने की एफआरपी में बढ़ोत्तरी की गई है, लेकिन चीनी का एमएसपी 7 साल से समान चल रही है. इसकी वजह से चीनी मिलों के सामने कैश फ्लो का संकट गहराता जा रहा है. केंद्र को चीनी का एमएसपी बढ़ाने का फैसला लेना चाहिए.

इस सीजन चीनी उत्पादन 22 फीसदी बढ़कर 159 लाख टन के पार

देश के चीनी क्षेत्र ने 2025-26 सीजन में अब तक पर्याप्त गन्ने की उपलब्धता और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की अच्छी पैदावार ने चीनी उत्पादन को बढ़ा दिया है. ISMA के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक अखिल भारतीय चीनी उत्पादन 159.09 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि के 130.44 लाख टन की तुलना में लगभग 22 फीसदी अधिक है. चालू चीनी मिलों की संख्या में भी थोड़ी वृद्धि हुई है, वर्तमान में 518 मिलें पेराई कर रही हैं, जबकि पिछले सीजन में इसी समय 500 मिलें चालू थीं.

यूपी, महाराष्ट्र में चीनी का बंपर उत्पादन

उत्तर प्रदेश ने 46.05 लाख टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया है, जो जनवरी के मध्य तक पिछले साल की तुलना में 3.23 लाख टन था, जो लगभग 8 की बढ़ोत्तरी दर्शाता है. वहीं, महाराष्ट्र ने इस सीजन में उच्च पेराई दर दर्ज की है, चीनी उत्पादन 64.50 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले सीजन की इसी अवधि की तुलना में लगभग 51 फीसदी का पर्याप्त सुधार है. राज्य में वर्तमान में 204 मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 196 मिलें चालू थीं. इसके साथ ही कर्नाटक ने भी पेराई की गति में सुधार दर्ज किया है, चीनी उत्पादन पिछले सीजन की इसी अवधि की तुलना में लगभग 13 फीसदी बढ़ा है.

राज्यों ने गन्ना मूल्य बढ़ाया पर चीनी एक्स मिल मूल्य गिरने से इंडस्ट्री को झटका

उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा सरकारों की ओर से गन्ने की कीमतों में वृद्धि के बाद बिहार सरकार ने भी हाल ही में गन्ने की कीमत में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी करके 380 रुपये प्रति क्विंटल भाव कर दिया है. कीमतों में यह बदलाव किसानों के लिए बेहतर हैं. बढ़ते गन्ने और चीनी उत्पादन लागत और गिरती एक्स मिल चीनी कीमतों के बीच बढ़ता अंतर मिलों के वित्त और गन्ना पेमेंट साइकिल पर लगातार दबाव डाल रहा है. वर्तमान में, महाराष्ट्र और कर्नाटक में एक्स मिल चीनी की कीमतें और गिरकर लगभग 3,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं, जो चीनी की वर्तमान उत्पादन लागत से काफी कम है.

चीनी मिलों के सामने कैश फ्लो का संकट गहरा रहा

इस्मा ने कहा कि गन्ना भुगतान बकाया बढ़ना शुरू हो गया है और यदि मौजूदा बाजार की स्थिति यही बनी रहती है तो यह और बढ़ सकता है. गन्ने की कीमतों और चीनी की बिक्री से होने वाली कमाई के बीच लगातार बेमेल होने के कारण इंडस्ट्री को बढ़ते ऑपरेशनल और कैश फ्लो तनाव का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में बढ़ते प्रोडक्शन कॉस्ट के हिसाब से चीनी के मिनिमम सेलिंग प्राइस (MSP) में जल्दी बदलाव करना, फाइनेंशियल हालत को ठीक करने, किसानों को समय पर गन्ने का पेमेंट सुनिश्चित करने और मार्केट में स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होगा.

भरपूर स्टॉक, सरकार बढ़ा सकती है राशन में चीनी सप्लाई

वहीं, जैसे-जैसे चीनी सीजन आगे बढ़ेगा और चीनी का स्टॉक भी बढ़ता रहेगा. देश में चीनी का भरपूर स्टॉक हो गया है. इससे खुले बाजार में चीनी की रिटेल कीमतों में उछाल की आशंका खत्म होती नजर आती है और उपभोक्ताओं को महंगी कीमतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. वहीं, भरपूर स्टॉक होने के चलते सरकार मुफ्त राशन में चीनी सप्लाई की मात्रा को भी बढ़ाने का फैसला ले सकती हैय

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