फरवरी में करें प्याज की इन किस्मों की बुवाई, 400 क्विंटल होगी पैदावार.. बस 15 दिन पहले करें ये काम

प्याज की फसल करीब 140 से 145 दिनों में तैयार हो जाती है. कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देने से बल्ब मजबूत बनते हैं और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराने से सही उर्वरक चुनने में मदद मिलती है.

Kisan India
नोएडा | Published: 20 Jan, 2026 | 04:40 PM

Onion Farming: अब रबी प्याज की बुवाई का सीजन चल रहा है. बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड सहित कई राज्यों में किसान प्याज की बुवाई कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि प्याज की खेती में परंपरागत फसलों के मुकाबले ज्यादा मुनाफा होता है. लेकिन कई बार उम्मीद के मुताबिक पैदावार नहीं होती है. ऐसे में नुकसान उठाना पड़ता है. लेकिन किसान अगर वैज्ञानिक विधि से प्याज की खेती करते हैं, तो कम लागत में ज्यादा पैदावार मिलेगी. बस उन्हें एक्सपर्ट के बताए बतों को अपनाना होगा.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, परंपरागत फसलों की तुलना में प्याज की खेती से किसान अपनी आमदनी दोगुनी तक बढ़ा सकते हैं. मौजूदा समय प्याज की रोपाई के लिए अनुकूल है. क्योंकि जनवरी से फरवरी का महीना रबी प्याज के लिए सबसे अच्छा हता है. ऐसे किसान वैज्ञानिक तरीकों से खेती करें तो कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

60 किलो पोटाश डालने से फसल मजबूत होती है

कृषि जानकारों का कहना है कि वैज्ञानिक खेती अपनाने से प्याज की पैदावार  और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं. उन्होंने कहा कि खेत की सही तैयारी बेहद जरूरी है. एक हेक्टेयर खेत में 20 से 25 क्विंटल अच्छी सड़ी गोबर खाद, 100 किलो नाइट्रोजन, 50 किलो फास्फोरस और 60 किलो पोटाश डालने से फसल मजबूत होती है. नर्सरी के लिए 8 से 10 किलो बीज ऊंची क्यारियों में बोना चाहिए. इसके अलावा सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी अहम भूमिका है. ‘अरका वेजिटेबल स्पेशल’ का 3 ग्राम प्रति लीटर घोल छिड़कने से उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.

पैदावार के लिए गंधक और जिंक की कमी

प्याज की अच्छी पैदावार के लिए गंधक और जिंक  की कमी होने पर उनकी पूर्ति करना जरूरी है. इससे प्याज का आकार, रंग और गुणवत्ता बेहतर होती है. रोगों से बचाव के लिए बीज और नर्सरी की मिट्टी को थीरम, ट्राइकोडर्मा या अन्य कवकनाशकों से उपचारित करना चाहिए, ताकि शुरुआती रोग न लगें और फसल सुरक्षित रहे. इससे पैदावार बढ़ती है और किसानों की आय में सीधा फायदा होता है.

बिहार के किसानों के लिए उन्नत किस्में

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज की फसल करीब 140 से 145 दिनों में तैयार हो जाती है. कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देने से बल्ब मजबूत बनते हैं और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराने से सही उर्वरक चुनने में मदद मिलती है. एक्सपर्ट का कहना है कि बिहार के लिए भीमा किरण और भीमा शक्ति किस्में सबसे उपयुक्त हैं, जिनसे प्रति हेक्टेयर करीब 400 क्विंटल तक उपज मिल सकती है, जबकि सामान्य किस्मों से 250-300 क्विंटल उत्पादन होता है. बेहतर पैदावार, अच्छी गुणवत्ता और स्थिर बाजार भाव के कारण प्याज बिहार के किसानों के लिए आय बढ़ाने वाली प्रमुख फसल बनती जा रही है.

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