प्याज बुवाई से पहले खेत में मिला दें जली हुई ये राख, बड़े-बड़े होंगे कंद.. स्वाद में भी आएगा निखार
कई राज्यों में आज भी रासायनिक खाद की बजाय देसी और जैविक खाद का ज्यादा उपयोग किया जाता है. गोबर की खाद, कंपोस्ट और पत्तियों से बनी खाद प्याज के लिए बहुत फायदेमंद होती है. यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और प्याज का स्वाद भी अच्छा बनाती है.
बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों में किसानों ने रबी प्याज की बुवाई शुरू कर दी है. लेकिन कई किसानों का कहना है कि काफी मेहनत और खर्च करने के बावजूद भी उन्हें उम्मीद के मुताबिक उपज नहीं मिलती है. कई बार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. लेकिन अब ऐसे किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि आज हम ऐसे देसी टिप्स बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाते ही प्याज की पैदावार बढ़ जाएगी और कंद का साइज भी बड़ा-बड़ा होगा.
कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, किसान अगर प्याज की अच्छी पैदावार चाहते हैं, तो देसी और पारंपरिक तरीका अपनाएं. इसके लिए मिट्टी की सही तैयारी जरूरी है. किसान खेत या गार्डन की मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद और लकड़ी की राख मिलाएं, जिससे मिट्टी भुरभुरी रहती है और प्याज के बल्ब मोटे बनते हैं. गमले या बेड तैयार करते समय मिट्टी, गोबर और रेत का संतुलित मिश्रण करें, ताकि पानी सही तरीके से निकले और पौधों को पोषण मिले.
पौधों के बीच सही दूरी रखना भी जरूरी है
साथ ही पौधों के बीच सही दूरी रखना भी जरूरी है. एक्सपर्ट का कहना है कि प्याज के पौधे 8- 10 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाने चाहिए. इससे हर पौधे को पर्याप्त जगह मिलती है और बल्ब बड़े और रसदार बनते हैं. साथ में सिंचाई का संतुलन भी अहम है. ज्यादा पानी से बल्ब सड़ सकते हैं और कम पानी से पौधे कमजोर हो जाते हैं. इसलिए सुबह हल्की सिंचाई करें और मिट्टी हमेशा हल्की नम रहे. गमलों में ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए, ताकि पानी जमा न हो. इस तरह से आप कम जगह में भी मोटे और स्वादिष्ट प्याज उगा सकते हैं.
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जैविक खाद डालने से पौधों को मिलता है पोषण
पहाड़ी इलाकों में आज भी रासायनिक खाद की बजाय देसी और जैविक खाद का ज्यादा उपयोग किया जाता है. गोबर की खाद, कंपोस्ट और पत्तियों से बनी खाद प्याज के लिए बहुत फायदेमंद होती है. यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और प्याज का स्वाद भी अच्छा बनाती है. समय-समय पर हल्की मात्रा में जैविक खाद डालने से पौधों को लगातार पोषण मिलता रहता है.
कीट और रोग से बचाने के लिए किसान देसी उपाय अनाएं
वहीं, कीट और रोग से बचाने के लिए किसान देसी उपाय अपनाएं. नीम की पत्तियों का पानी में उबला घोल और गौमूत्र का हल्का घोल प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में काम करता है. इससे फसल सुरक्षित रहती है और रासायनिक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती. इसके अलावा मिट्टी की देखभाल भी जरूरी है. किसान हर 10- 15 दिन में मिट्टी को हल्के हाथ से खुदाई करते रहें, जिससे हवा पहुंचती है, जड़ें मजबूत होती हैं और खरपतवार निकल जाते हैं.
5- 6 घंटे धूप मिले और मौसम हल्की नमी वाला हो
धूप और जलवायु प्याज के लिए अहम हैं. दिन में कम से कम 5- 6 घंटे धूप मिले और मौसम ठंडा और हल्की नमी वाला हो, तो प्याज अच्छे आकार और स्वाद में बढ़ता है. प्याज की फसल तब निकालें जब पत्तियां पीली होकर झुकने लगें. इसके बाद कुछ दिनों तक छांव में सुखाएं, ताकि नमी पूरी तरह खत्म हो जाए. सही तरीके से सुखाई गई प्याज लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और किचन गार्डन में उगाई प्याज भी लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सकती है.