गेहूं बुवाई से पहले भूलकर भी न करें ये गलती, फसल हो सकती है चौपट.. जिंक सल्फेट का समझें जादू

कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आपने पिछले तीन सालों से खेत में जिंक सल्फेट  नहीं डाला है, तो इस सीजन में जरूर डालें. जिंक की कमी से न सिर्फ पैदावार घटती है, बल्कि गेहूं की गुणवत्ता भी कमजोर हो जाती है. लेकिन किस तरह और किस मात्रा में जिंक सल्फेट डालें ये जानना जरूरी है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Oct, 2025 | 03:41 PM

Wheat Farming: धान कटाई के बाद किसान गेहूं बुवाई की तैयारी में लग गए हैं. लेकिन किसानों को गेहूं की बुवाई करने से पहले छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, नहीं तो पैदावार प्रभावित भी हो सकती है. क्योंकि अधिकांश किसान गेहूं बुवाई के दौरान बहुत अधिक मात्रा में डीएपी का इस्तेमाल करते हैं. उन्हें लगता है कि गेहूं के लिए डीएपी ही सबसे अच्छा उर्वरक है, पर ऐसी बात नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं के लिए जिंक सल्फेट भी बहुत ही जरूरी पोषक तत्व है. लेकिन इसके इस्तमाल का सही तरीका जानना आवश्यक है.

कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आपने पिछले तीन सालों से खेत में जिंक सल्फेट  नहीं डाला है, तो इस सीजन में जरूर डालें. जिंक की कमी से न सिर्फ पैदावार घटती है, बल्कि गेहूं की गुणवत्ता भी कमजोर हो जाती है. लेकिन ध्यान रखें कि जिंक सल्फेट को फास्फोरस वाली खाद के साथ कभी न मिलाएं, वरना उसका असर कम हो जाएगा. दरअसल, लगातार फसल बारिश के चलते मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. ऐसे में किसान खाद तो डालते हैं, लेकिन जरूरी हर तत्व नहीं डाल पाते. इसलिए समय-समय पर मिट्टी की जांच कराना बहुत जरूरी है. इससे ये पता चलता है कि किस पोषक तत्व  की कितनी जरूरत है और कितनी मात्रा में डालना है.

जिंक सल्फेट के इस्तेमाल के फायदे

जिन खेतों में पिछले तीन साल या उससे ज्यादा समय से जिंक सल्फेट का इस्तेमाल नहीं हुआ है, वहां इसकी कमी देखी गई है. ऐसे में रबी सीजन में गेहूं की बुवाई के समय अगर जिंक सल्फेट डाला जाए, तो फसल की ग्रोथ  बेहतर होती है और पैदावार भी बढ़ती है. इससे गेहूं के दाने मोटे और अच्छी क्वालिटी के तैयार होते हैं, जो बाजार में अच्छा दाम दिलाते हैं.

कितनी मात्रा में डालें जिंक सल्फेट

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, किसानों को प्रति एकड़ गेहूं की फसल में लगभग 10 किलो जिंक सल्फर जरूर डालें, लेकिन इसे फास्फोरस वाली खाद जैसे डीएपी, सुपर या एपीके के साथ कभी न मिलाएं. दोनों को एक साथ डालने पर ये मिट्टी में फिक्स हो जाते हैं. यानी पौधे इनसे पोषक तत्व नहीं ले पाते और इसका कोई फायदा नहीं होता.

मिट्टी की सेहत में सुधार

जिंक सल्फर का सबसे सही तरीका यह है कि इसे फास्फोरस  वाली खाद डालने से कम से कम एक हफ्ते पहले या एक हफ्ते बाद खेत में डालें. इससे मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है और गेहूं के पौधों को समय पर सही पोषण मिल जाता है. अगर जिंक सल्फर को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो गेहूं की पैदावार बेहतर होती है और मिट्टी भी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है.

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Published: 7 Oct, 2025 | 03:40 PM
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