चीनी की कीमतों में उछाल, कम बिक्री कोटे से घटी सप्लाई.. मई में 47 रुपये किलो था रेट
चीनी की बढ़ती कीमतों से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है. बिक्री कोटा कम रहने से बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई है. वहीं, कम स्टॉक और बढ़ती मांग ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है. सरकार के शुल्क मुक्त आयात के फैसले से 3-5 लाख टन चीनी बाजार में आने की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों में राहत मिल सकती है.
चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. मई में करीब 47 रुपये किलो बिकने वाली चीनी अब काफी महंगी हो गई है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कीमतों में तेजी के पीछे सिर्फ सट्टेबाजी जिम्मेदार नहीं है. सरकार की ओर से हर महीने तय किया जाने वाला बिक्री कोटा भी बाजार में चीनी की सप्लाई कम होने की एक बड़ी वजह है.
दरअसल, अक्टूबर 2025 से मई 2026 के बीच चीनी मिलों को घरेलू बाजार में बिक्री के लिए जितना कोटा दिया गया, वह मिलों की वास्तविक आपूर्ति से करीब 7 फीसदी कम रहा. वहीं, उपभोक्ताओं की मांग बढ़ने के बावजूद हर महीने का कोटा पिछले साल के स्तर के बराबर या उससे कम रखा गया. इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होती गई और कीमतों पर दबाव बढ़ा. खाद्य मंत्रालय चीनी क्षेत्र को नियंत्रित करता है और हर महीने प्रत्येक मिल के लिए बिक्री का कोटा तय करता है. चालू चीनी सीजन 2025-26 में अगस्त तक घरेलू बिक्री के लिए कुल 245.5 लाख टन चीनी का कोटा मंजूर किया गया है.
चीनी के स्टॉक की असली तस्वीर सामने आने लगी
चीनी सीजन खत्म होने के करीब है और अब बाजार में चीनी के वास्तविक स्टॉक को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है. उद्योग के मुताबिक, सरकार की ओर से बिक्री कोटा सीमित रखने की रणनीति का मकसद स्टॉक को संतुलित रखना था. हालांकि, कई मिलों ने तय कोटे से ज्यादा चीनी बाजार में बेची है. अक्टूबर 2025 से मई 2026 के बीच चीनी मिलों को घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 178.5 लाख टन का कोटा दिया गया था. इसके मुकाबले मिलों ने 191.5 लाख टन चीनी बाजार में भेजी. यानी मिलों ने तय सीमा से करीब 7 फीसदी ज्यादा चीनी बेची.
शुल्क मुक्त आयात से 3-5 लाख टन चीनी बाजार में आने की उम्मीद
इस आधार पर उद्योग का अनुमान है कि 2025-26 सीजन में देश में चीनी की घरेलू खपत 288 से 290 लाख टन के बीच रह सकती है. यह सरकारी अनुमानों से ज्यादा हो सकती है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एएलएस (ALS) योजना के तहत शुल्क मुक्त आयात की गई कच्ची चीनी को दोबारा निर्यात करने के बजाय घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति मिलने से करीब 3 से 5 लाख टन चीनी तुरंत बाजार में उपलब्ध हो सकती है. हालांकि, इसका कितना हिस्सा बाजार में आएगा, यह रिफाइनरियों पर निर्भर करेगा. सूत्रों का कहना है कि अगर एक साथ बड़ी मात्रा में चीनी बाजार में उतारी गई तो कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है. इसलिए स्टॉक को धीरे-धीरे और जरूरत के हिसाब से बाजार में उतारे जाने की संभावना है.
शुल्क मुक्त आयात के बाद एक्स-मिल कीमतों में गिरावट
चीनी की कीमतें बढ़ने के बीच बाजार में यह सवाल उठ रहा है कि सरकार की ओर से अतिरिक्त स्टॉक जारी किए जाने के बाद भी खुदरा और थोक कीमतें कितनी कम होंगी. हालांकि, शुल्क मुक्त आयात के फैसले के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन इसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी की औसत थोक कीमत 19 अगस्त को 5,004.59 रुपये प्रति क्विंटल थी. यह 26 अगस्त को बढ़कर 6,036 रुपये प्रति क्विंटल हो गई. यानी एक हफ्ते में कीमत में करीब 1,031 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई.
20 अगस्त को औसत थोक कीमत 5,153.72 रुपये, 21 अगस्त को 5,381.39 रुपये, 22 अगस्त को 5,617.53 रुपये, 23 अगस्त को 5,866.67 रुपये, 24 अगस्त को 5,829.94 रुपये और 25 अगस्त को 5,923.88 रुपये प्रति क्विंटल रही. वहीं, खुदरा बाजार में भी चीनी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कुछ राज्य सरकारें सब्सिडी वाली चीनी बेचने पर विचार कर रही हैं.
कम स्टॉक और बढ़ती मांग से कीमतों पर दबाव
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के मुताबिक, 2025-26 सीजन में देश में चीनी की घरेलू खपत करीब 285 लाख टन रहने का अनुमान है. वहीं, एथेनॉल उत्पादन के लिए करीब 30 लाख टन चीनी के डायवर्जन को छोड़कर घरेलू चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है. ISMA के अनुसार, 30 सितंबर तक चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 36 लाख टन रह सकता है. 31 जुलाई तक यह स्टॉक करीब 80 लाख टन था. यानी सीजन खत्म होने तक स्टॉक में बड़ी गिरावट आने का अनुमान है. कम होता स्टॉक और मजबूत मांग चीनी की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है. हालांकि, शुल्क मुक्त आयात की चीनी बाजार में पहुंचने के बाद सप्लाई बढ़ने से कीमतों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.