यूपी में खुलेंगे 80 नए CBG प्लांट! 3500 करोड़ का निवेश आया, 25 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
UP CBG Plants: उत्तर प्रदेश के CBG सेक्टर में अब तक 3,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे करीब 25 हजार लोगों को रोजगार मिला है. राज्य में 70-80 नए CBG प्लांट लगाने की तैयारी है. सरकार जैव ऊर्जा को किसानों की आय, जैविक खाद और ग्रीन एनर्जी से जोड़ने पर जोर दे रही है.
CBG Investment UP: उत्तर प्रदेश में खेती और ऊर्जा के क्षेत्र को जोड़कर रोजगार के नए मौके तैयार किए जा रहे हैं. राज्य में कंप्रेस्ड बायो-गैस यानी CBG को बढ़ावा देने से जहां गांवों में उपलब्ध गोबर और कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं इससे रोजगार और किसानों की आमदनी बढ़ाने की उम्मीद भी है. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के मुताबिक, राज्य के CBG सेक्टर में अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है और इससे करीब 25 हजार लोगों को रोजगार मिला है.
यूपी में 70 से 80 नए CBG प्लांट लगाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में अभी करीब 20 CBG प्लांट चल रहे हैं. अब सरकार इनकी संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कृषि मंत्री के मुताबिक, आने वाले समय में राज्य में 70 से 80 नए CBG प्लांट लगाए जा सकते हैं. इन प्लांट के बढ़ने से CBG का उत्पादन बढ़ेगा और गांवों में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे. इससे किसानों और ग्रामीण लोगों को भी फायदा मिल सकता है. हालांकि, सरकार का मानना है कि CBG सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए नई तकनीक, निवेश, बेहतर सुविधाओं और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं पर अभी और काम करना होगा.
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार बन सकती है जैव ऊर्जा
सरकार जैव ऊर्जा को सिर्फ ईंधन के एक नए विकल्प के तौर पर नहीं देख रही है, बल्कि इसे किसानों की कमाई बढ़ाने से भी जोड़कर देख रही है. CBG बनाने के लिए गोबर, फसल के बचे हुए हिस्से और दूसरे जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जाता है. इससे किसानों को खेत और पशुपालन से निकलने वाले कचरे से भी अतिरिक्त कमाई करने का मौका मिल सकता है. साथ ही, खेतों में पड़े फसल अवशेष और गोबर का सही इस्तेमाल होने से कचरे की समस्या भी कम होगी. सरकार का मानना है कि जैव ऊर्जा को बढ़ावा देने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
खेतों को मिलेगी जैविक खाद
CBG प्लांट का एक और फायदा खेती से जुड़ा है. इन प्लांट में गैस बनाने के बाद बचने वाले पदार्थ से जैविक खाद तैयार की जा सकती है. इस खाद का इस्तेमाल खेतों में किया जा सकता है. कृषि मंत्री के मुताबिक, इससे मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी. लंबे समय में जैविक खाद का इस्तेमाल खेती की लागत को कम करने और जमीन की उर्वरता बनाए रखने में भी उपयोगी हो सकता है.
गोबर और कृषि अपशिष्ट पहुंचाना बड़ी चुनौती
CBG सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कच्चे माल को प्लांट तक पहुंचाना है. गोबर और कृषि अपशिष्ट मुख्य रूप से गांवों में मिलता है, जबकि प्लांट हर गांव में नहीं होते. ऐसे में इन चीजों को इकट्ठा करने और प्लांट तक पहुंचाने के लिए बेहतर व्यवस्था की जरूरत होगी. साथ ही परिवहन का खर्च भी कम रखना जरूरी होगा. कृषि मंत्री ने कहा कि प्लांट को कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले किसानों को उसका उचित दाम देना होगा.
5,000 करोड़ रुपये के नए निवेश समझौते
उत्तर प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार काम किया जा रहा है. कृषि मंत्री के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में सौर ऊर्जा समेत अलग-अलग स्रोतों से 5,000 मेगावाट से ज्यादा बिजली पैदा की गई है. सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश इथेनॉल और CBG का उत्पादन करने वाले देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए एक कार्यक्रम के दौरान करीब 5,000 करोड़ रुपये के नए निवेश समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए. सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में ग्रीन एनर्जी का उत्पादन बढ़ेगा, निवेश आएगा और रोजगार के नए मौके पैदा होंगे.
कम बारिश से खेती पर नजर
इस बीच राज्य में खेती के लिए मौसम की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है. कृषि मंत्री के अनुसार, इस मॉनसून सीजन में अब तक उत्तर प्रदेश में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है. फिलहाल सरकार के मुताबिक फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन अगर आगे भी बारिश कमजोर रही तो कुछ इलाकों में किसानों की मुश्किल बढ़ सकती है. ऐसे में सरकार की नजर एक तरफ ग्रीन एनर्जी और CBG से रोजगार बढ़ाने पर है, तो दूसरी तरफ कमजोर बारिश के बीच खेती को बचाए रखने पर भी है.