गेहूं निर्यात खुलते ही दाम में तेजी, 150 रुपये से ज्यादा उछला भाव.. यूपी में 2640 रुपये क्विंटल रेट

गेहूं के निर्यात से जुड़ी पाबंदियां हटने के बाद घरेलू मंडियों में गेहूं के दाम 150 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा बढ़ गए हैं. यूपी की मंडियों में भी तेजी दिख रही है. हालांकि, खुदरा बाजार पर अभी असर नहीं पड़ा है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं और मक्के की कीमतें बढ़ने से चिंता बढ़ी है. अल नीनो का खतरा भी मंडरा रहा है.

नोएडा | Published: 3 Sep, 2026 | 08:30 AM

सरकार की ओर से 24 अगस्त को गेहूं और इससे बने आटा, मैदा और सूजी के निर्यात पर लगी चार साल पुरानी रोक हटाने के बाद घरेलू बाजार में गेहूं के दाम बढ़ गए हैं. गेहूं की कीमतों में अब तक 150 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों में गेहूं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. लखनऊ में 17 अगस्त से गेहूं का भाव 2,466 रुपये से बढ़कर 2,640 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के भाव करीब तीन साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. इससे गेहूं उद्योग के एक वर्ग की चिंता बढ़ गई है. कारोबारियों को डर है कि अगर अल नीनो का असर पड़ा तो आने वाली रबी फसल प्रभावित हो सकती है. वैश्विक एजेंसियों ने अल नीनो के मार्च 2027 तक बने रहने का अनुमान जताया है.

गेहूं के दाम बढ़ने को लेकर कारोबारियों के बीच अलग-अलग राय है. व्यापारियों के एक वर्ग का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि भारतीय गेहूं अभी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी नहीं है. दिल्ली के निर्यातक राजेश जैन पाहाड़िया ने अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन को कहा कि भारतीय गेहूं दूसरे देशों के गेहूं के मुकाबले करीब 30 डॉलर प्रति टन महंगा है.

मंडियों में गेहूं महंगा हुआ, लेकिन खुदरा बाजार में अभी असर नहीं दिखा

हालांकि, कृषि मंडियों में गेहूं के बढ़े दाम का असर अभी खुदरा बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में इसका असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के प्राइस मॉनिटरिंग डिविजन के मुताबिक, देश में गेहूं का औसत खुदरा भाव 31.58 रुपये प्रति किलो है. अलग-अलग जगहों पर इसकी कीमत 22 रुपये से 55 रुपये प्रति किलो के बीच है.

यूपी की मंडियों में गेहूं महंगा, रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद चिंता बढ़ी

उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों में गेहूं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. लखनऊ में 17 अगस्त से गेहूं का भाव 2,466 रुपये से बढ़कर 2,640 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. वहीं, हरदोई में दारा गेहूं की कीमत 2,408.21 रुपये से बढ़कर 1 सितंबर को 2,553.31 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई. एक मिलर के मुताबिक, इस साल गेहूं की फसल पिछले साल के मुकाबले 7-8 फीसदी कम है. सरकार ने करीब 3.6 करोड़ टन गेहूं की खरीद की है. साथ ही मक्के के दाम भी बढ़ रहे हैं. ऐसे में अल नीनो के खतरे के बीच गेहूं का निर्यात शुरू करने को लेकर चिंता जताई जा रही है.

हालांकि, कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक इस साल देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 12.066 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 11.795 करोड़ टन था. भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के अनुसार, 1 अगस्त तक देश में गेहूं का स्टॉक 5 साल के उच्च स्तर 5.053 करोड़ टन पर था.

मक्के के दाम भी 3 साल के ऊंचे स्तर पर

गेहूं के साथ-साथ मक्के की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है. अमेरिका में इस साल मक्के की फसल कम रहने की आशंका के चलते बुधवार को इसका भाव बढ़कर 5.15 डॉलर प्रति बुशल यानी करीब 202 डॉलर प्रति टन पहुंच गया. यह करीब तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है. अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद (IGC) के मुताबिक, 2026-27 में दुनिया में गेहूं का उत्पादन घटकर 81.7 करोड़ टन रह सकता है, जबकि इस सीजन में यह 84.4 करोड़ टन रहने का अनुमान है. दूसरी ओर, वैश्विक खपत 3 करोड़ टन बढ़कर 82.6 करोड़ टन पहुंच सकती है. गेहूं का बचा हुआ स्टॉक भी 10 करोड़ टन घटकर करीब 27.5 करोड़ टन रहने का अनुमान है.

 

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