फरीदकोट में देर से हो रही गेहूं खरीदी, किसानों को 4 दिनों तक करना पड़ रहा इंतजार, जानें वजह
फरीदकोट की मंडियों में मजदूर-ट्रांसपोर्ट विवाद के कारण गेहूं उठान धीमी हो गई है. अनाज जमा होने से जगह की कमी और किसानों का 3-4 दिन इंतजार बढ़ गया है. सरकारी एजेंसियों ने 72 घंटे में उठान सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है, वरना नुकसान की जिम्मेदारी तय होगी.
Wheat Procurement: पंजाब के फरीदकोट में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा रहा है. मंडियों के अंदर नई आवक को रखने के लिए जगह की कमी है. ऐसे में गेहूं खरीदी की रफ्तार धीमी हो गई है. कहा जा रहा है कि मंडियों में मजदूर और ट्रांसपोर्ट ठेकेदारों के बीच विवाद चल रहा है. इससे उपज का उठान समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मजदूर और ट्रांसपोर्ट ठेकेदारों के बीच कल रहे विवाद के चलते कमीशन एजेंट और सरकारी खरीद एजेंसियां फंस गई हैं. गेहूं की उठान धीमी होने से मंडियों में भारी मात्रा में अनाज जमा हो गया है. कहा जा रहा है कि यह टकराव अब अपने अहम दौर में पहुंच गया है, जिससे खरीदे गए गेहूं को सरकारी गोदामों तक पहुंचाने की प्रक्रिया काफी धीमी हो गई है. वहीं, मंडियों पर दबाव बढ़ने से जगह की कमी होने लगी है. ऐसे में किसान भी परेशान हैं, क्योंकि उन्हें अपनी फसल बेचने और उठान के लिए 3-4 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि मंडियों में लगातार नई फसल आ रही है.
ट्रांसपोर्ट काम का कर रहे विरोध
एक ठेकेदार गुट, जिसे राजनीतिक समर्थन मिलने का आरोप है, दूसरे गुट से जुड़े ट्रांसपोर्ट काम का विरोध कर रहा है. वहीं, दूसरे गुट ने फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग को लिखित शिकायत दी है कि उनके पास गेहूं ढोने के लिए गाड़ियां उपलब्ध हैं, लेकिन मंडियों में लोडिंग के लिए मजदूर नहीं दिए जा रहे. शिकायत के बाद पनग्रेन, मार्कफेड, पनसुप और पंजाब राज्य भंडारण निगम ने सोमवार को संयुक्त चेतावनी जारी की. उन्होंने कमीशन एजेंटों को निर्देश दिया कि खरीदे गए गेहूं की उठान 72 घंटे के भीतर सुनिश्चित करें. एजेंसियों ने यह भी कहा कि देरी होने पर अनाज के वजन में कमी या नुकसान के लिए एजेंट जिम्मेदार होंगे.
बारिश होने पर हो सकता है नुकसान
कमीशन एजेंटों का कहना है कि वे दोनों तरफ से फंसे हुए हैं. एक तरफ एक ठेकेदार के लोग मजदूरों को धमका रहे हैं और लोडिंग नहीं होने दे रहे, तो दूसरी तरफ सरकारी एजेंसियां देरी के लिए एजेंटों को जिम्मेदार ठहरा रही हैं. एजेंटों का कहना है कि इस स्थिति पर उनका कोई कंट्रोल नहीं है. इस टकराव की वजह से मंडियों में भीड़ और ज्यादा बढ़ गई है. गेहूं खुले में पड़ा है और मौसम बदलने के कारण खराब होने का खतरा बना हुआ है. साथ ही बारिश की आशंका के चलते किसानों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि समय पर उठान नहीं हो पा रही.
मंडियों से बोरियां हो रहीं चोरी
हालात इतने खराब हो गए हैं कि सुरक्षा की समस्या भी सामने आने लगी है. एजेंट और किसानों का आरोप है कि नशेड़ी लोग मंडियों में घूमकर गेहूं की बोरियां चुरा रहे हैं, जिससे उन्हें रात में जागकर निगरानी करनी पड़ रही है. अधिकारियों ने माना है कि स्थिति गंभीर है और इस गतिरोध को खत्म कर जल्द से जल्द गेहूं की उठान सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं. डिस्ट्रिक्ट फूड एंड सप्लाई कंट्रोलर गुरजीत सिंह ने कहा है कि जो भी खरीद या लिफ्टिंग में देरी करेगा, उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा. तब तक, कमीशन एजेंट कॉन्ट्रैक्टर की टक्कर, एडमिनिस्ट्रेटिव चेतावनियों और किसानों के बढ़ते गुस्से के बीच फंसे रहेंगे, क्योंकि फरीदकोट में गेहूं खरीद सिस्टम को चलने में मुश्किल हो रही है.