गन्ना फसल को तबाह कर सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां! बारिश में किसान तुरंत अपनाएं ये उपाय

Ganne Ki Kheti: बरसात का मौसम गन्ने की फसल के लिए जितना फायदेमंद होता है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है. नमी बढ़ते ही खेतों में लाल सड़न, पोक्काह बोइंग और तना छेदक जैसे रोग तेजी से फैलने लगते हैं, जो पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, इस समय गन्ना बेल्ट वाले इलाकों में किसानों की चिंता और भी बढ़ जाती है. ऐसे में सही समय पर देखभाल, पोषण और जल निकासी की व्यवस्था करना फसल को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी कुंजी बन जाता है.

नोएडा | Updated On: 17 Jul, 2026 | 01:29 PM
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Sugarcane crop protection methods Ganne Ki Kheti: बरसात का मौसम गन्ने की फसल के लिए जितना फायदेमंद होता है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है. नमी बढ़ते ही खेतों में लाल सड़न, पोक्काह बोइंग और तना छेदक जैसे रोग तेजी से फैलने लगते हैं, जो पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, इस समय गन्ना बेल्ट वाले इलाकों में किसानों की चिंता और भी बढ़ जाती है. ऐसे में सही समय पर देखभाल, पोषण और जल निकासी की व्यवस्था करना फसल को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी कुंजी बन जाता है.

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बरसात के मौसम में गन्ने की फसल पर लाल सड़न, पोक्काह बोइंग और तना छेदक जैसे खतरनाक रोगों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर गन्ना बेल्ट जैसे पश्चिम चंपारण में इसका असर ज्यादा देखा जाता है.

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इस मौसम में फसल की नियमित देखभाल बेहद जरूरी है, ताकि फंगस और अन्य बीमारियों से बचाव हो सके और गन्ने की बढ़वार सही तरीके से होती रहे.

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एक्सपर्ट के अनुसार, देर से बोई गई बसंतकालीन गन्ने की फसल में तेजी से ग्रोथ के लिए प्रति एकड़ 40–45 किग्रा यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करना जरूरी माना जाता है.

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जिन किसानों ने पहले से यूरिया दे दिया है, वे 18:18:18 पानी में घुलनशील उर्वरक का 2 किग्रा प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें, इससे पौधों को अतिरिक्त पोषण मिलता है.

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बरसात में खेत में जलजमाव सबसे बड़ा खतरा होता है, क्योंकि इससे फसल सड़ने लगती है, इसलिए नालियों और जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त रखना अनिवार्य है.

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अगर फसल में लाल सड़न या फंगस जैसे रोगों के लक्षण दिखें, तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर 2–3 बार छिड़काव करने से फसल सुरक्षित रहती है और पैदावार बेहतर होती है.

Published: 17 Jul, 2026 | 01:19 PM

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