जनवरी में गेहूं की फसल पर मंडरा रहा बड़ा खतरा! दिखे ये लक्षण तो तुरंत डालें सिर्फ 1 ग्राम ये दवा, नहीं तो नुकसान तय

Gehun Ki Kheti: जनवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए बेहद अहम होता है, क्योंकि इसी समय खेतों में हरियाली लहलहाने लगती है और किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद बांधता है. लेकिन जरा-सी लापरवाही या मौसम की मार आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. अगर समय रहते गेहूं में पनपने वाली खतरनाक बीमारियों को नहीं पहचाना जाए, तो फसल खेत में ही दम तोड़ सकती है. ऐसे में जरूरी है कि किसान सतर्क रहें और सही जानकारी के साथ अपनी फसल को नुकसान से बचाएं.

नोएडा | Published: 15 Jan, 2026 | 05:13 PM
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जनवरी में गेहूं की फसल तेजी से बढ़ती है, लेकिन इसी समय मौसम का उतार-चढ़ाव बीमारियों को न्योता देता है. तापमान और नमी में बदलाव होने से रोग जल्दी फैलने लगते हैं, जिससे फसल को भारी नुकसान हो सकता है.

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कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं में करनाल बंट रोग सबसे खतरनाक माना जाता है. इस रोग से दाने काले पड़ने लगते हैं और बालियां खराब होकर पाउडर जैसी हो जाती हैं, जिससे बाजार में गेहूं की कीमत भी गिर जाती है.

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करनाल बंट एक बीज से फैलने वाला रोग है. अगर बुवाई से पहले बीज का उपचार न किया जाए, तो बीमारी खेत में तेजी से फैल सकती है. इसलिए बीज उपचार को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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अगर गेहूं की बालियों में कालापन दिखे और दाने दबाने पर अंदर से सफेद पाउडर निकले, तो यह करनाल बंट रोग का साफ संकेत है. ऐसे में देर करना भारी पड़ सकता है.

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रोग दिखते ही प्रोपिकोनाजोल दवा का छिड़काव करना बेहद जरूरी है. 1 ग्राम दवा को 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से रोग को फैलने से रोका जा सकता है.

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करनाल बंट रोग हवा और सिंचाई के पानी के जरिए तेजी से फैलता है. इसलिए समय पर दवा का छिड़काव और रोग-रोधी किस्मों का चयन करके किसान अपनी फसल और मेहनत दोनों को बचा सकते हैं.

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