सरसों की खेती में की ये गलती तो आधी पैदावार होगी बर्बाद! जानें कम लागत में बंपर उत्पादन का आसान फॉर्मूला
Sarson Ki Kheti: सरसों की खेती अगर सही तरीके से की जाए, तो यह फसल किसानों के लिए सोना उगलने वाली मशीन बन सकती है. लेकिन अफसोस, थोड़ी सी जानकारी की कमी और गलत तकनीक के कारण किसान मेहनत तो पूरी करते हैं लेकिन मुनाफा बस आधा ही रह जाता है. ऐसे में मिट्टी से लेकर बीज, खाद, सिंचाई और कीट नियंत्रण तक, अगर हर कदम वैज्ञानिक तरीके से उठाया जाए, तो कम लागत में बंपर पैदावार मिलना तय है. यही वजह है कि कृषि वैज्ञानिक सरसों की खेती को स्मार्ट फार्मिंग का मजबूत हथियार मानते हैं.
सरसों की अच्छी पैदावार का पहला मंत्र है बुआई से पहले मिट्टी की जांच. इससे खेत में पोषक तत्वों की सही स्थिति पता चलती है और किसान जरूरत के मुताबिक उर्वरक डालकर बेवजह का खर्च बचा सकते हैं.
सरसों की फसल में सल्फर का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. इससे न सिर्फ दाना ज्यादा बनता है, बल्कि तेल की मात्रा और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर हो जाती है.
पीएसबी और एजोटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरकों के प्रयोग से सरसों की पैदावार करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. साथ ही मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है.
प्रति एकड़ सिर्फ 2 किलो बीज का प्रयोग करें और बुआई से पहले कार्बेन्डाजिम से बीज उपचार जरूर करें. इससे फसल शुरुआती बीमारियों से सुरक्षित रहती है.
बुआई के तुरंत बाद पेन्डीमेथालीन का छिड़काव करने से खरपतवार नहीं उगते और सरसों के पौधों को मिट्टी का पूरा पोषण मिलता है, जिससे बढ़वार तेज होती है.
सरसों में दो बार सिंचाई अनिवार्य है. फूल और फली बनने से पहले सही समय पर सिंचाई, यूरिया, यूमिक एसिड और जरूरत पड़ने पर कीटनाशक के प्रयोग से उत्पादन में साफ बढ़ोतरी होती है.